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पाकिस्तान के परमाणु बम का जनक अब्दुल कादिर खान को माना जाता है. पाकिस्तान को दुनिया की पहली इस्लामी परमाणु हथियार शक्ति बनाने के लिए उनकी प्रशंसा की गई, लेकिन अनुय देशों ने उन्हें एक खतरनाक गद्दार के रूप में देखा.
अब्दुल कादिर खान को पाकिस्तान के परमाणु बम का जनक कहा जाता है. अब्दुल कादिर खान एक पाकिस्तानी परमाणु भौतिक विज्ञानी और धातुकर्म इंजीनियर थे. उन्हें बोलचाल की भाषा में "पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम के जनक " के रूप में जाना जाता है. 1 अप्रैल, 1936 को भारत के भोपाल में जन्मे खान उस समय एक छोटे बालक थे जब उनका परिवार ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के अंत में उपमहाद्वीप के खूनी 1947 के विभाजन के दौरान पाकिस्तान चला गया था. उन्होंने 1960 में कराची विश्वविद्यालय से विज्ञान की डिग्री पूरी की, फिर नीदरलैंड और बेल्जियम में उन्नत अध्ययन पूरा करने से पहले बर्लिन में धातुकर्म इंजीनियरिंग का अध्ययन किया.
भारत से 1952 में पाकिस्तान चले गए मुहाजिर प्रवासी खान ने पश्चिमी यूरोपीय तकनीकी विश्वविद्यालयों के धातुकर्म इंजीनियरिंग विभागों में शिक्षा प्राप्त की, जहां उन्होंने धातु मिश्र धातुओं के चरण संक्रमण , यूरेनियम धातु विज्ञान और गैस सेंट्रीफ्यूज पर आधारित आइसोटोप पृथक्करण में अध्ययन का बीड़ा उठाया. 1974 में भारत के "स्माइलिंग बुद्ध " परमाणु परीक्षण के बारे में जानने के बाद, खान ने 1976 में खान रिसर्च लेबोरेटरीज (केआरएल) की स्थापना करके परमाणु हथियार विकसित करने के अपने देश के गुप्त प्रयासों में शामिल हो गए और कई वर्षों तक इसके मुख्य वैज्ञानिक और निदेशक दोनों रहे.
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अब्दुल कादिर खान ने पाकिस्तान में विज्ञान की पढ़ाई करने के बाद यूरोप का रुख किया. 1972 में उन्होंने बेल्जियम की यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की डिग्री ली और एम्सटरडैम में FDO नामक रिसर्च संस्था में काम करने लगे. यह संस्था URENCO नाम की यूरोपीय न्यूक्लियर फैसिलिटी के लिए तकनीकी सलाह देती थी. अब्दुल कादिर को 1974 में अलमेलो स्थित URENCO प्लांट के सबसे गुप्त हिस्से में 16 दिन काम करने का मौका मिला. यहीं से उन्होंने अल्ट्रासेंट्रीफ्यूज टेक्नोलॉजी’ के दस्तावेज चुराए. इसी तकनीक से यूरेनियम के संवर्धन द्वारा परमाणु बम तैयार किया जाता है. उन्होंने जर्मन से डच में दस्तावेजों का अनुवाद करते हुए हर वह राज निकाला जिससे बम बन सके.
जनवरी 1976 में अब्दुल कादिर खान अचानक पाकिस्तान लौट आए और एफडीओ से इस्तीफा दे दिया. पाकिस्तान जाकर उन्होंने काहूटा में न्यूक्लियर रिसर्च शुरू की. उन्होंने कनाडा जैसे देशों से सेंट्रीफ्यूज पार्ट्स की तस्करी के लिए एजेंट्स को खत भी लिखे. इसके बाद CIA ने एक रिपोर्ट में चेताया कि पाकिस्तान कुछ ही वर्षों में परमाणु बम बना सकता है. पाकिस्तानी राष्ट्रपति जिया उल हक दुनिया को भरोसा दिलाते रहे कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है. लेकिन अब्दुल कादिर खान धीरे-धीरे अपने मिशन में लगे रहे.
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