दुनिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की त्रिनिदाद और टोबैगो की ऐतिहासिक द्विपक्षीय यात्रा ने भारत और कैरेबियाई देशों के बीच संबंधों को नई मजबूती दी है. यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 1999 के बाद पहली त्रिनिदाद यात्रा थी, जिसमें रणनीतिक, डिजिटल, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग के नए आयाम जुड़े.
प्रधानमंत्री मोदी और उनकी समकक्ष कमला प्रसाद बिसेसर के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने छह महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए. ये समझौते बुनियादी ढांचे, औषधि, स्वास्थ्य सेवाएं, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, और यूपीआई प्रणाली जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाएंगे. साथ ही आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई गई.
इस यात्रा का एक बड़ा कूटनीतिक संदेश यह रहा कि त्रिनिदाद और टोबैगो ने भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए खुलकर समर्थन दिया. यह समर्थन उस समय और भी खास हो जाता है जब पाकिस्तान और चीन जैसे देश भारत की इस दावेदारी का विरोध करते हैं. बदले में भारत ने भी त्रिनिदाद की 2027-28 की UNSC अस्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन किया.
पीएम मोदी ने त्रिनिदाद की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू से भी मुलाकात की. उन्होंने इस मुलाकात को “भारत-त्रिनिदाद मैत्री को नई गति देने वाला पल” बताया. मोदी ने राष्ट्रपति को उनकी प्रवासी भारतीय सम्मान के लिए बधाई भी दी.
भारत ने त्रिनिदाद में रह रहे भारतीय मूल की छठी पीढ़ी के लोगों को OCI (ओवरसीज सिटीजनशिप ऑफ इंडिया) कार्ड देने की घोषणा की, जिससे भारत से उनका जुड़ाव और गहरा होगा.
मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए क्रिकेट से लेकर चटनी म्यूज़िक और कैलिप्सो तक भारतीय समुदाय के योगदान की सराहना की. उन्होंने कहा, "राजनीति से कविता तक, क्रिकेट से वाणिज्य तक, हर क्षेत्र में भारतीय मूल के लोग त्रिनिदाद की ताकत हैं."