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धरती से 500 KM ऊपर चल रही है नई जंग? जमीन पर पिटने के बाद अब स्पेस से नई साजिश रच रहा पाकिस्तान!

जमीन पर तनाव कम होने के दावों के बीच, अब भारत और पाकिस्तान के बीच अंतरिक्ष में एक खामोश जंग शुरू हो चुकी है.

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धरती से 500 KM ऊपर चल रही है नई जंग? जमीन पर पिटने के बाद अब स्पेस से नई साजिश रच रहा पाकिस्तान!

अंतरिक्ष में जंग की तैयारी? (AI Image)

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  • पाकिस्तान की अंतरिक्ष क्षमता में अचानक आई तेजी
  • जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 6 नए अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में किए तैनात 
  • ये भारतीय इलाकों पर लगातार नजर रखने में सक्षम 
  • पाकिस्तान के इस स्पेस प्रोग्राम के पीछे चीन की तकनीकी और वित्तीय ताकत

ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब लगा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जमीनी तनाव कुछ कम हुआ है, ठीक उसी समय जमीन से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में एक नया और खामोश मुकाबला शुरू हो गया. पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर अंतरिक्ष से जासूसी करने की अपनी ताकत को बहुत तेजी से बढ़ाया है.

बीते महज 16 महीनों के भीतर पाकिस्तान ने एक के बाद एक 6 अर्थ-ऑब्जर्वेशन यानी पृथ्वी की निगरानी करने वाले सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ दिए हैं. सैटेलाइट्स का यह पूरा कुनबा अब भारतीय इलाकों पर लगातार नजर रखने में सक्षम हो चुका है.

सुस्त रफ्तार से अचानक आई तेजी

यह बदलाव हैरान करने वाला इसलिए है क्योंकि पाकिस्तान का स्पेस प्रोग्राम हमेशा से कछुए की रफ्तार से चलता रहा है. साल 1961 में अपनी स्पेस एजेंसी 'सुपार्को' बनाने के बाद से कई दशकों तक पाकिस्तान ने इक्का-दुक्का सैटेलाइट ही लॉन्च किए थे. लेकिन जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच उसने अचानक 6 नए निगरानी सैटेलाइट अंतरिक्ष में तैनात कर दिए. दिलचस्प बात यह है कि इसकी शुरुआत पहलगाम हमले और भारत के ऑपरेशन सिंदूर के जवाब से ठीक पहले ही हो चुकी थी.

भारतीय नौसेना के पूर्व फ्लैग ऑफिसर, रियर एडमिरल सुधीर पिल्लई ने अपने एक विश्लेषण में बताया कि बात सिर्फ सैटेलाइट्स की संख्या की नहीं है, बल्कि उनके काम करने के तरीके की है. अंतरिक्ष में जिस तरह इन्हें सेट किया गया है और इनमें जो सेंसर लगे हैं, उन्हें देखकर साफ पता चलता है कि ये सिर्फ मौसम या खेती पर नजर रखने वाले आम नागरिक सैटेलाइट नहीं हैं, बल्कि इनका मुख्य मकसद सैन्य जासूसी है.

इन सैटेलाइट्स के पास क्या ताकत है?

द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये सैटेलाइट्स जमीन की बेहद साफ तस्वीरें ले सकते हैं, वहां होने वाले छोटे से छोटे बदलाव को भांप सकते हैं और छिपकर रखी गई सैन्य चीजों का भी पता लगा सकते हैं. अक्टूबर 2025 में लॉन्च किया गया पाकिस्तान का 'HS-1' सैटेलाइट खास तकनीक से लैस है. यह साधारण कैमरों को चकमा देने वाली चीजों और अलग-अलग तरह के मटेरियल की पहचान आसानी से कर सकता है. इसके बाद भेजे गए 'PRSC-EO2' और 'PRSC-EO3' सैटेलाइट्स में एडवांस इमेजिंग और एआई की मदद से डेटा प्रोसेस करने की खूबी है, जिससे जानकारी पलक झपकते ही मिल जाती है. इनमें से कुछ सैटेलाइट को लगभग 513 किमी की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है.

पीछे खड़ा है ड्रैगन!

पाकिस्तान की इस छलांग के पीछे असल दिमाग और ताकत चीन की है. कई सैटेलाइट्स को चीनी रॉकेटों के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया, जबकि कइयों को दोनों देशों ने मिलकर तैयार किया. चीन सिर्फ रॉकेट नहीं दे रहा, बल्कि पाकिस्तान को सैटेलाइट डिजाइन करने की टेक्नोलॉजी और खुफिया डेटा भी शेयर कर रहा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण अप्रैल 2026 में लॉन्च हुआ 'PRSC-EO3' सैटेलाइट है. अमेरिकी स्पेस ट्रैकिंग फर्म 'कॉमस्पॉक' की स्टडी बताती है कि इस सैटेलाइट को पूरी दुनिया पर नजर रखने के लिए नहीं, बल्कि खास तौर पर दक्षिण एशिया के चक्कर लगाने के लिए सेट किया गया है.

इसका मतलब है कि यह सैटेलाइट हर रोज कई बार पाकिस्तान और उत्तर भारत (विशेषकर जम्मू-कश्मीर) के ऊपर से गुजरता है और दिन में कई बार वहां की लाइव तस्वीरें और खुफिया जानकारी जुटा सकता है. चीन के पास पहले से ही 'याओगान' और 'गाओफेन' जैसी खतरनाक सैटेलाइट सीरीज का नेटवर्क है. अब पाकिस्तान के इस नए सिस्टम के जुड़ने से इस्लामाबाद की खुफिया क्षमता कई गुना बढ़ गई है.

भारत और इसरो के लिए चिंता की बात क्यों?

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब भारत के लिए अंतरिक्ष के मोर्चे पर पिछले दो साल थोड़े उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन को अपने कुछ महत्वपूर्ण अर्थ-ऑब्जर्वेशन और नेविगेशन सैटेलाइट मिशनों में तकनीकी दिक्कतों या असफलताओं का सामना करना पड़ा है.

इसमें कोई शक नहीं है कि अंतरिक्ष विज्ञान के मामले में भारत, पाकिस्तान से कोसों आगे है. लेकिन अब भारत को अपने पड़ोस में बढ़ रही सैन्य-अंतरिक्ष क्षमताओं को देखते हुए अपनी रणनीतियों को और तेजी से बदलना होगा. भविष्य की जंगें सिर्फ जमीन पर लड़े जाने वाले हथियारों से नहीं, बल्कि इस बात से तय होंगी कि अंतरिक्ष से मिल रही लाइव जानकारियों पर किसका कब्जा है.

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