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जापान के F-2A लड़ाकू विमान मिलिट्री एक्सरसाइज में शामिल हो रहे हैं, जिसका डिजाइन पाकिस्तान के F-16 बेड़े से मिलता-जुलता है. दरअसल F-2A विमानों को जापान की मित्सुबिशी और अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने संयुक्त रूप से डेवलेप किया है.
भारतीय वायुसेना और जापान की एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के फाइटर जेट्स जोधपुर में हवाई अभ्यास करेंगे. दोनों देशों की ओर से 'वीर गार्जियन 2026' नाम दिया गया है. यह आज यानी 9 सितंबर से 22 सितबंर 2026 तक चलेगा. ये मिलिट्री एक्सरसाइज भारत-जापान के बीच रणनीतिक संबंधों में एक मील का पत्थर है क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है, जब लड़ाकू विमान किसी संयुक्त अभ्यास के लिए भारतीय वायुसेना के अड्डे पर उड़ान भरेंगे.
जापानी वायु सेना (JASDF) के दो C-2 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट हाल ही में जोधपुर में उतरे, जिससे जापानी दल पश्चिमी राजस्थान पहुंच गया है. इस एक्सरसाइज में जापान के त्सुइकी वायु अड्डे पर तैनात 8वीं वायु सेना के तीन F-2A लड़ाकू विमान और लगभग 110 जवान शामिल होंगे, जबकि भारतीय वायुसेना के मजबूत बेड़े की ओर से स्वदेशी एलसीए तेजस और सुखोई-30 शामिल होंगे. वीर गार्जियन एक्सरसाइज का पहला संस्करण जनवरी 2023 में जापान में आयोजित हुआ था. जोधपुर में होने वाली इस मिलिट्री एक्सरसाइज से पाकिस्तान की नींद उड़ गई है.
जापान के F-2A लड़ाकू विमान इस मिलिट्री एक्सरसाइज में शामिल हो रहे हैं, जिसका डिजाइन पाकिस्तान के F-16 बेड़े से मिलता-जुलता है. दरअसल F-2A विमानों को जापान की मित्सुबिशी और अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने संयुक्त रूप से डेवलेप किया है. लॉकहीड मार्टिन ने ही F-16 को डेवलेप किया था, जिसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ किया था. हालांकि जापानी F-2A, F-16 का अपग्रेडेट वर्जन है, जोकि आकार में काफी बड़ा है. बावजूद इसके F-2A विमान मूल फाइटर जेट की बुनियादी डिजाइन विशेषताएं और स्पीड लगभग बराबर है.
यह अभ्यास भारतीय वायु सेना के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है क्योंकि पाकिस्तान के पास करीब 75 से 80 F-16 फाइटिंग फाल्कन विमानों का बेड़ा है, जो पाकिस्तानी वायु सेना की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमानों में से हैं. इसलिए F-2 के साथ और संभवतः उसके खिलाफ ट्रेनिंग प्राप्त करने से भारतीय पायलटों को एक ऐसे विमान की स्टडी करने और उसके खिलाफ संचालन करने का अवसर मिल सकता है जो आकार और डिजाइन में एफ-16 से काफी मिलता-जुलता है.
F-16 से विकसित होने के बावजूद F-2 में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं. इसका विंग एरिया F-16 से करीब 25 फीसदी बड़ा है. बॉडी लंबी है और हॉरिजेंटल टेल भी बड़ी है. बड़े विंग के कारण इसमें अतिरिक्त ईंधन भंडारण और अधिक हथियार स्टेशन लगाए जा सकते हैं. यह विमान एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार के साथ सेवा में आने वाला पहला उत्पादन लड़ाकू विमान भी था और इसमें जापानी-विकसित प्रणालियां जैसे कि इसके फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल और एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सूट शामिल हैं. मल्टी रोल फाइटर जेट के रूप में डिजाइन किया गया F-2 हवा से हवा और हवा से सतह दोनों तरह के मिशनों को अंजाम दे सकता है. हालांकि इसे समुद्री हमले और तटीय रक्षा अभियानों के लिए तैयार किया गया है.
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