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साउथ अफ्रीका की संवैधानिक अदालत ने माना कि सदियों से चला आ रहा यह कानून लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देता है. यह कानून औपनिवेशिक दौर की देन था.
शादी के बाद पत्नी अपने पति का सरनेम अपनाती है. यह सदियों से चला आ रहा है. लेकिन क्या यह सही है? क्या यह लैंगिग भेदभाव नहीं है? दक्षिण अफ्रीका की सर्वोच्च अदालत ने इसको लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. कोर्ट के फैसले के अनुसार, अब पति भी अपनी पत्नी का सरेनम इस्तेमाल कर सकता है. पहले इस देश का कानून पुरुषों को इस बात की इजाजत नहीं देता था, लेकिन महिलाएं आसानी से बदल सकती थीं.
दरअसल, यह लड़ाई Henry van der Merwe और Andreas Nicolas Bornman ने मिलकर लड़ी. Henry अपनी पत्नी Jana Jordaan का सरनेम अपनाना चाहते थे. वहीं, Andreas अपनी पत्नी के सरनेम Donnelly को अपने नाम के साथ जोड़ना चाहते थे, लेकिन देश का कानून उन्हें ऐसा करने से रोक रहा था. कपल्स ने कोर्ट में इसको चुनौती दी. निचली अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद कपल्स के हक में फैसला दिया.
निचली अदालत का फैसला उनके लिए काफी नहीं था. क्योंकि आगे चलकर कोई ऊपरी अदालत में चुनौती दे सकता था. ऐसे में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किय और सर्वोच्च अदालत ने भी ट्रायल कोर्ट का फैसला सही मानते हुए मुहर लगा दी.
साउथ अफ्रीका में पहले नहीं था ये कानून
संवैधानिक अदालत ने माना कि सदियों से चला आ रहा यह कानून लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देता है. यह कानून औपनिवेशिक दौर की देन था. यूरोपीय उपनिवेशवाद और ईसाई मिशनरियों के बाद ही यह पंरपरा बनी की शादी के बाद पत्नी को पति का सरनेम अपनाना होगा. जबकि उससे पहले अफ्रीकी संस्कृति में ऐसा नहीं होता था. अफ्रीकी संस्कृति में पति-पत्नी कोई भी किसी का सरनेम अपना सकता था. यहां तक की बच्चे भी मां के क्लैन नेम पहचाने जाते थे.
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कोर्ट के कहा कि अब पितृसत्तात्मक सोच को खत्म करने का समय आ गया है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि हमें ऐसे कानूनों को बदलना होगा, जो महिला-पुरुषों में भेदभाव करते हैं. हमारे देश ने जेंडर इक्विटी में काफी प्रगति की है.
कोर्ट के इस फैसले के बाद अफ्रीकी संसद को Births and Deaths Registration Act में बदलाव करना होगा. तभी यह नया अधिकार पूरी तरह लागू हो पाएगा. हालांकि, देश के कानून मंत्री ने भी इस फैसले का समर्थन किया है. गृह मंत्री Leon Schreiber और न्याय मंत्री Mamoloko Kubayi ने माना कि यह कानून पुराना हो चुका है. इसमें संशोधन होना चाहिए.
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