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अमेरिका की एक कंपनी युद्धक्षेत्र अभियानों के लिए एक रोबोट सैनिक बना रही है. यह रोबोट ऊबड़-खाबड़ इलाकों में चल सकता है, इमारतों में प्रवेश कर सकता है और सैनिकों के आगे बढ़ने से पहले खतरनाक क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर सकता है.
अब तक आपने ऐसे सैनिक फिल्मों में ही देखे होंगे जो लोहे के बने हों और युद्ध के मैदान में बिना किसी डर-भय के मोर्चा संभाल रहे हों. लेकिन जल्द ही ये कल्पना सच हो सकती है. रोबोट सैनिकों का कॉन्सेप्ट वास्तविकता बन सकता है. इस दिशा में एक अमेरिकी स्टार्टअप तेजी से काम कर रहा है. ह्यूमनॉइड सोल्जर्स के इस प्रोग्राम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप का समर्थन हासिल है.
'वायर्ड' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में सैन फ्रांसिस्को स्थित रोबोटिक्स स्टार्टअप 'फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज' अंतरराष्ट्रीय युद्ध क्षेत्रों की अग्रिम पंक्तियों पर तैनात होने में सक्षम रोबोट सैनिक बना रही है. इस स्टार्टअप को अमेरिकी रक्षा मंत्रालय से 24 मिलियन डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट मिला है. डोनाल्ड ट्रंप के बेटे इरिक ट्रंप इस स्टार्टअप में शुरुआती निवेशक और रणनीतिक सलाहकार हैं.
कंपनी ने 'फैंटम' नाम का एक भारी और मजबूत ह्युमनॉइड रोबोट डिजाइन किया है जिसका वजन लगभग 80 किलोग्राम है. से युद्ध के मैदान में दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला करने और अपने सैनिकों की जान बचाने के उद्देश्य से बनाया गया है.
इस कार्यक्रम की सबसे खास बात ये है कि 'फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज' ने जो 'फैंटम MK-1' ह्यूमनॉइड रोबोट बनाया है, उसे यूक्रेन में लाइव ऑपरेशनल टेस्टिंग के लिए भेजा जा चुका है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ऐसे दो रोबोट का इस्तेमाल विवादित इलाकों में जाने, सामान उठाने और उपकरण ले जाने के लिए किया गया.
'फैंटम MK-1' लगभग 20 किलोग्राम वजन उठा सकता है. हालांकि शुरुआती परीक्षणों में कुछ कमियां भी सामने आई हैं. युद्ध के मैदान में पता चला कि इसमें पूरी तरह से वॉटरप्रूफिंग की कमी थी और बैटरी लाइफ भी सीमित थी. इससे सबक लेकर कंपनी अब अपनी अगली पीढ़ी के 'फैंटम 2' को यूक्रेनी फ्रंट लाइन पर भेजने की तैयारी कर रही है. 'फैंटम 2' में 40 किलोग्राम वजन उठाने की क्षमता होगी. इन रोबोट सैनिकों को विकसित कर रही कंपनी का कहना है कि उसका लक्ष्य अगले 12 से 18 महीनों के भीतर अमेरिकी सेना की सक्रिय फ्रंट लाइन पर इन ह्यूमनॉइड यूनिट्स को तैनात करना है.
'फाउंडेशन फ्यूचर इंडस्ट्रीज' ने ये भी बताया है कि ज्यादातर घातक अभियानों में इन रोबोट्स की इंसानी निगरानी की जाएगी. लेकिन FFI ने माना है कि उसके रोबोट विशेष परिस्थितयों में खुद से भी फैसले ले सकते हैं.