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ताइवान पर चीनी हमले की तलवार हमेशा लटकती रहती है. चीन सैन्य अभ्यासों के जरिए अपना सियासी संदेश देता रहता है. अब चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की किसी भी आक्रामकता से निपटने के लिए ताइवान ने 'ड्रोन हेलस्केप' प्लान तैयार किया है.
China vs. Taiwan: ताइवान हमेशा इस डर के साये में रहता है कि किसी दिन अचानक चीन उस पर हमला कर सकता है. चीन की सैन्य ताकत के सामने ताइवान कहीं नहीं ठहरता. ये बात ताइवान को भी पता है, इसीलिए ताइवान ड्रोन और बिना पायलट वाले विमानों में भारी निवेश करके चीन के संभावित हमले से निपटने की तैयारी कर रहा है. ताइवान ने चीन की विशाल 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' से निपटने के लिए एक खास 'ड्रोन हेलस्केप' प्लान तैयार किया है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
ताइवान का 'ड्रोन हेलस्केप' प्लान कुछ हद तक यूक्रेन युद्ध से प्रेरित है. इस रणनीति में दुश्मन सेना का पता लगाने और उन पर हमला करने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जाता है. 'ड्रोन हेलस्केप' प्लान के तहत ताइवान के आस-पास ड्रोन का ऐसा जाल बनाना है जिससे दुश्मन के लिए इससे पार पाना मुश्किल हो जाए.
न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में ताइवान की इस रणनीति के बारे में बताया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, योजना यह है कि ड्रोन का इस्तेमाल करके चीनी सेना का पता लगाया जाए. चीनी सेना की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाये और ताइवान तक पहुंचने से पहले ही PLA पर हमला कर दिया जाए.
ये योजना ताइवान की पारंपरिक "पॉर्क्युपाइन रणनीति" का एक आधुनिक रूप है. इसका मकसद चीन की विशाल 'पीपुल्स लिबरेशन आर्मी' से सीधी टक्कर लेने से बचना है. ताइवान PLA का सामना महंगे पारंपरिक हथियारों जैसे कि फाइटर जेट या बड़े युद्धपोत से करने के बजाय, सस्ते और एआई से लैस घातक ड्रोनों की बौछार से करने की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है. ड्रोन हेलस्केप प्लान का उद्देश्य चीनी सेना को ताइवान के तट पर पहुंचने से पहले ही रोक देना या नष्ट कर देना है.
'ड्रोन हेलस्केप' प्लान के तहत ताइवान जलडमरूमध्य को 4 अलग-अलग सुरक्षा परतों में बांटा गया है. इसका आउटर लेयर तट से 80 से 40 किमी तक होगा. इस क्षेत्र में जैसे ही चीनी जहाजों का बेड़ा ताइवान की ओर बढ़ेगा, पानी के नीचे छिपे अंडरवाटर ड्रोन विस्फोट करेंगे. इसके अलावा लंबी दूरी के आत्मघाती ड्रोन चीनी बेड़े पर हमला बोलकर उनके एयर डिफेंस इंटरसेप्टर को खत्म करेंगे.
तट से 40 से 5 किमी दूर के समुद्री क्षेत्र को मिडिल लेयर माना जाएगा. इसमें समुद्री बारूदी सुरंगों और मानव रहित नावों के जरिए चीनी लैंडिंग क्राफ्ट्स को रोका जाएगा और उन्हें दिशा बदलने पर मजबूर कर एकतरफा हमला करने वाले ड्रोनों का निशाना बनाया जाएगा. तीसरा लेयर तट से 5 किमी की दूरी तक होगा. इस सीमा तक पहुंचने वाले चीनी युद्धपोतों को कम दूरी के घातक और भारी ड्रोनों से निशाना बनाया जाएगा.
सुरक्षा का सबसे अंतिम लेयर जमीन पर मौजूद सैनिकों का होगा. अगर चीनी सेना तट तक पहुंचती है तो ताइवानी सैनिक मोर्चा संभालेंगे. चीनी जहाजों को शॉर्ट-रेंज मिसाइलों का इस्तेमाल कर नष्ट किया जाएगा. ताइवान इस योजना पर गंभीरत से काम कर रहा है. ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के प्रशासन ने घरेलू स्तर पर ड्रोन उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है. ताइवान का लक्ष्य 2028 तक अपने सालाना ड्रोन उत्पादन को 1,80,000 यूनिट तक ले जाना है.