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हूती गुटों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों में सऊदी गठबंधन ने यमन के कई इलाकों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में यह मिसाइल और ड्रोन रेड की गई है.
हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर से सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए धावा बोल दिया. यहां हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिण पश्चिमी इलाकों समेत खमीस और मुशैत में एक के बाद एक कई मिसाइल और ड्रोन दागे हैं, जिसमें सैन्य एयरबेस को निशाना बनाया गया. इस हमले में 13 लोग घायल हो गये हैं. वहीं सऊदी ने अपने तीन शहर खमीस मुशैत, आभा और ताइफ में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया है. क्या ये सिर्फ दो देशों की दुश्मनी है, या फिर यह पूरी दुनिया के लिए किसी बड़े आर्थिक संकट की आहट है? आइए जानते हैं कि आखिर कैसे ये युद्ध ग्लोबर इकॉनमी को प्रभावित कर सकता है.
हाल ही में यमन की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाकों में सनसनी फैला दी. हूती विद्रोहियों का दावा है कि उन्होंने इस एयरबेस के कमांड सेंटरों और हथियारों के ठिकानों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है. हालांकि सऊदी प्रशासन ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाते हुए स्थिति को कंट्रोल कर लिया. साथ ही चेतावनी के बाद खतरे के टलने की पुष्टि की.
यह जंग अचानक शुरू नहीं हुई है. हूती गुटों का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों में सऊदी गठबंधन ने यमन के कई इलाकों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में यह मिसाइल और ड्रोन रेड की गई है. जमीनी स्तर पर लाल सागर के तटीय इलाकों और बंदरगाहों पर कब्जे की जंग ने इस तनाव को एक खतरनाक मोड़ दे दिया है. दोनों तरफ से हो रहे हमलों ने शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.
लाल सागर के मुहाने पर मौजूद पेरिम द्वीप पर कब्जे के साथ ही हूतियों ने सऊदी अरब के तेल निर्यात वाले इलाकों में जमकर बमबारी की है. इसकी वजह से सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन ठप हो गई है. यह 1200 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन सऊदी ने आज से 46 साल पूर्व 1980 में होर्मुज स्ट्रेट के विकल्प के रूप में बनाई थी. एक्सपर्ट्स की मानें तो इसके ठप होने की वजह से ग्लोबल ऑयल सप्लाई में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है. यानी कच्चे तेल के दाम 4 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं, जो सीधे रूप से पेट्रोल और डीजल पर प्रभाव डालेंगे.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर मंडराते खतरे का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा. इसकी वजह मिडिल ईस्ट के तनाव को प्रभाव अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों पर पड़ता है. अगर सप्लाई चेन बाधित होती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम चढ़ सकते हैं. इसकी वजह से परिवहन और रोजमर्रा की जरूरतें महंगी हो सकती हैं.
एक्सपर्ट्स की मानें तो हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच चल रहा संघर्ष एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है. इसके पीछे की वजह से हूती विद्रोहियों की खुली चेतावनी और सऊदी अरब की जवाबी सैन्य कार्रवाई है, जो आने वाले दिनों में हालात को और ज्यादा पेचीदा बना सकती है. वहीं सऊदी ने यमनी वायु सेना ने मोचा पोर्ट के पास बमबारी बढ़ा दी है, लेकिन हूतियों ने पश्चिमी तट के ज्यादा क्षेत्र में अपना कब्जा बनाया हुआ है. इसके साथ ही हूतियों ने ट्रंप को भी सऊदी अरब के साथ चल रहे संघर्ष से दूर रहने की सलाह दी है.