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बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, मंदिरों को तोड़ने जैसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं. इसी बीच बांग्लादेश सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और बेहतर हैं.
Bangladesh Hindu Violence: बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा, मंदिरों को तोड़ने जैसी घटनाएं आए दिन सामने आ रही हैं. इसी बीच बांग्लादेश सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और बेहतर हैं. मोहम्मद यूनुस सरकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाए जाने की झूठी खबरें भारतीय मीडिया द्वारा फैलाई जा रही हैं.
'मीडिया झूठ फैला रही'
Indian Today को दिए इंटरव्यू में मोहम्मद यूनुस सरकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू अच्छी तरह सुरक्षित हैं. शेख हसीना के शासनकाल की तुलना में वे अधिक संरक्षित हैं. हम यहां जो देख रहे हैं वह भारत से शुरू होने वाला एक 'औद्योगिक पैमाने का मिसइन्फोर्मेशन कैंपेन' है.
बता दें, अगस्त में शेख हसीना के नेतृत्व वाली अवामी लीग सरकार के पतन के बाद से मंदिरों पर हमलों की एक श्रृंखला और हिंदू समुदाय के सदस्यों पर दमन की घटनाएं शुरु हुई हैं. तीन हिंदू पुजारियों की गिरफ्तारी ने पड़ोसी देश में अशांति की एक नई लहर को हवा दी है, जिसके चलते पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक सड़कों पर उतर आए हैं. हालांकि, आलम ने स्वीकार किया कि चटगांव में एक मंदिर को निशाना बनाया गया और पिछले सप्ताह तीन इस्कॉन केंद्रों पर हमले का प्रयास किया गया.
आलम ने आगे कहा, 'हमने इन सभी स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी है. हम यहां लिंग, जातीयता, नस्ल और रंग के बावजूद हर बांग्लादेशी के मानवाधिकारों को बचाए रखने के लिए हैं.
'इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की कोई योजना नहीं'
आलम ने कहा कि आवामी लीग सरकार के कार्यकाल में हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर अत्याचार हुए, लेकिन तब किसी भी मीडिया हाउस ने एक भी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की. उन्होंने आगे कहा, 'क्योंकि यह शेख हसीना के समय में हुआ था, इसलिए किसी भी भारतीय मीडिया की ओर से एक भी रिपोर्ट नहीं आई. इस्कॉन पर कार्रवाई की बात से इनकार करते हुए अधिकारी ने रेखांकित किया कि सरकार ने वास्तव में सुरक्षा के लिए धार्मिक संगठन के केंद्रों पर सेना भेजी थी.
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही बांग्लादेशी अटॉर्नी जनरल ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान इसे 'कट्टरपंथी संगठन' कहा था. हालांकि, अदालत ने इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया. कुछ दिनों बाद, अधिकारियों ने इस्कॉन से जुड़े 17 लोगों के बैंक खातों को फ्रीज करने का आदेश दिया.
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