दुनिया
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, 1 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ राजधानी में प्रदर्शन कर रही है. उन्हें रोकने कि लिए 80,000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया गया है.
नेपाल के बाद अब फ्रांस में सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा फूट पड़ा है. बजट कटौती के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी पेरिस में लोगों का आंदोलन हिंसक होता जा रहा है. प्रदर्शनकारी सड़कों पर तोड़फोड़ और आगजनी कर रहे हैं. कई सरकारी वाहन जला दिए गए हैं.
200 से ज्यादा उपद्रवी गिरफ्तार
'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के अनुसार, 1 लाख से ज्यादा लोगों की भीड़ राजधानी में प्रदर्शन कर रही है. उन्हें रोकने कि लिए 80,000 से ज्यादा सैनिकों को तैनात किया गया है. अब तक 200 से ज्यादा उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
प्रदर्शनकारियों ने पेरिस में एक सरकारी बस में आग लगा दी. दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में बिजली सप्लाई को ठप कर दिया गया है. जिसकी वजह से ट्रेन सेवाओं को रोक दिया गया है. गृह मंत्री ने लेफ्ट पार्टियों पर विद्रोह कराने का आरोप लगाया है. दरअसल, लेफ्ट पार्टियों ने फ्रांस बंद का आह्वान किया है. जिसे 'ब्लॉक एवरीथिंग' नाम दिया गया है.
#Paris, les manifestants essayent de pénétrer dans la Gare du Nord. La police fait usage de gaz lacrymogène. #streetreporter #france #onbloquetout #10septembre #blocus #bloquonstout #10septembre2025 #blocus #manifestation pic.twitter.com/0YMheEOyRC
— Jules Ravel (@JulesRavel1) September 10, 2025
राष्ट्रपति मैक्रों के खिलाफ क्यों है रोष?
फ्रांस में जनता के एक बड़े वर्ग को लगता है कि इमैनुएल मैक्रों सरकार की नीतियां आम लोगों के हितों के खिलाफ हैं. वह सिर्फ अमीर लोगों को फायदा पहुंचा रहे हैं. सरकार ने खर्चों में कटौती और कल्याणकारी योजनाओं में कमी करके आम जनता के गुस्से को और बढ़ा दिया है. खासकर मध्यमवर्ग और श्रमिक वर्ग के लोगों का. लोगों में हाल ही में चुने गए सेबास्टियन लेकोर्नू को प्रधानमंत्री को लेकर भी रोष है. फ्रांस में 2 साल के अंदर यह पांचवें प्रधानमंत्री बनाए गए हैं.
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