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टेलर ग्रीन ने कहा कि अमेरिका अपने ही इंटेलिजेंस आकलन को नजरअंदाज कर रहा है. इन आकलनों से संकेत मिलते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन इजरायल की तरफ से मिल रही चेतावनियों को ज्यादा अहमियत दे रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच हुए सीजफायर समझौते की दो महीने की मियाद सोमवार (17 अगस्त, 2026) को खत्म हो रही है. हालांकि, 60 दिनों में दोनों तरफ से युद्ध खत्म करने के लिए न तो बातचीत करके कोई फैसला लिया गया और न ही हमले रुके, समझौते के नौ दिन बाद ही दोनों मुल्कों ने एक-दूसरे पर अटैक शुरू कर दिए थे. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में पूर्व अमेरिकी सांसद ने ऐसा दावा किया है, जिससे पूरी दुनिया के होश उड़ने वाले हैं. पूर्व कांग्रेसवुमेन मार्जोरी टेलर ग्रीन का कहना है कि अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है क्योंकि इसके लिए व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारी रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं.
मार्जोरी टेलर ग्रीन ने रविवार (16 अगस्त, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि यह हाई-लेवल बातचीत वास्तिवक थी. हालांकि, टेलर ग्रीन की तरफ से ऐसा कोई दस्तावेज या सबूत पेश नहीं किया गया, जो उनके दावों का समर्थन करता हो. यहां तक की उन्होंने जिस हाई-लेवल मीटिंग का दावा किया है, उसमें कौन-कौन से अधिकारी शामिल हुए, इसकी भी उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है. टेलर ग्रीन ने ईरान के खिलाफ किसी भी परमाणु कार्रवाई के गंभीर वैश्विक परिणामों की चेतावनी दी है और कहा कि ऐसा कदम बड़े सैन्य टकराव को जन्म दे सकता है, जिसमें बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान के साथ ग्लोबल इकोनॉमी पर भी गंभीर असर पड़ सकता है.
टेलर ग्रीन ने यह भी आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन परमाणु कार्रवाई की सीमा को कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने ही इंटेलिजेंस आकलन को नजरअंदाज कर रहा है. इन आकलनों से संकेत मिलते हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में नहीं है, लेकिन वॉशिंगटन इजरायल की तरफ से मिल रही चेतावनियों को ज्यादा अहमियत दे रहा है. हालांकि, उनके इन दावों पर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और न ही अपनी न्यूक्लियर पॉलिसी में कोई बदलाव या ईरान पर परमाणु हमले की तैयारी जैसी कोई बात कही है.
मार्जोरी टेलर ग्रीन रिपब्लिकन पार्टी की नेता हैं और अमेरिकी कांग्रेस की पूर्व सदस्य हैं. साल 2020 में वह कांग्रेस के लिए चुनी गईं. उन्हें उनके बेबाक अंदाज के लिए जाना जाता है. हालांकि, वह खुद को ट्रंप की कट्टर समर्थक बताती हैं, लेकिन वह पहले भी ईरान को लेकर ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति के फैसलों का विरोध करती रही हैं. जून 2025 में जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे, तब भी उन्होंने ट्रंप प्रशासन पर विदेशों में सैन्य कार्रवाई और शासन परिवर्तन से जुड़े अभियानों से दूरी बनाने के अपने वादों के खिलाफ जाने का आरोप लगाया था.
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