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ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड? रूसी तेल खरीद पर भारत से 100% टैरिफ वसूलेगा अमेरिका, लेकिन यूरोप को छूट

इस बिल में अमेरिका जिन पांच देशों का टारगेट कर रहा है, उनमें- भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम शामिल है. यूएस सीनेट में पास हुआ बिल इन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति देता है.

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ट्रंप का डबल स्टैंडर्ड? रूसी तेल खरीद पर भारत से 100% टैरिफ वसूलेगा अमेरिका, लेकिन यूरोप को छूट

रूसी तेल खरीद पर टैरिफ लगाएगा अमेरिका

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  • अमेरिकी सीनेट ने रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाने वाला बिल पास किया है. 
  • इस बिल में भारत-चीन समेत 5 देशों को टारगेट किया है, लेकिन यूरोपीय देशों को छूट मिली है. 
  • इस बिल में टैरिफ रेट तय करने का अधिकार अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) को दिया गया है.

रूस से तेल खरीदने वाले देशों से अमेरिका 100 फीसदी टैरिफ वसूलेगा. इसको लेकर यूएस सीनेट से शुक्रवार को एक बिल पास हो गया. इसके मुताबिक, जो देश रूस से तेल और गैस खरीदेंगे, उन पर अमेरिका 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा. इस बिल में जिन 5 देशों को टारगेट किया गया है, उनमें भारत का भी नाम है, जबकि यूरोप में अमेरिका के सहयोगी देशों को इसमें छूट दी गई है. 
  
इस बिल में टैरिफ रेट तय करने का अधिकार अमेरिकी व्यापार मंत्रालय (USTR) को दिया गया है. इस बिल का मकसद भारत द्वारा रूस से खरीदे जा रहे तेल को टारगेट करना है. इस बिल को आधिकारिक तौर पर 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट 2026' के नाम से जाना जाएगा. इस बिल में प्रावधान है कि कौन-सा देश रूस से कितना तेल खरीदेगा, लेकिन वास्तविक दर USTR ही तय करेगा. इसमें राष्ट्रपति द्वारा छूट का प्रावधान है जिसके तहत कांग्रेस से प्रमाणीकरण और हर 180 दिनों में रिव्यू अनिवार्य है. 

किन 5 देशों को टारगेट कर रहा अमेरिका?

इस बिल में अमेरिका जिन पांच देशों का टारगेट कर रहा है, उनमें- भारत के अलावा चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम शामिल है. यूएस सीनेट में पास हुआ बिल इन देशों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति देता है, लेकिन अनिवार्य रूप से बाध्य नहीं करता. इस बिल को पेश करने वालों का कहना है कि टैरिफ का रेट इतना हाई होना चाहिए कि चीन और भारत रूस से तेल खरीद ही ना सकें. 
 
अमेरिका ने भारत पर उस समय भी 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जब ट्रंप की चेतावनी के बाद भी नई दिल्ली ने मॉस्को से तेल खरीद को कम नहीं किया था. अमेरिका के इस कदम की आलोचना करते हुए भारत ने इसे अनुचित और गैर-जरूरी बताया था. भारत ने कहा था कि रूस से निर्यात होने वाला तेल यूरोपीय देश भी खरीदते हैं. दिल्ली ने क्लीयर किया था कि वो अपनी जरूरत के हिसाब से तेल-गैस की खरीद करता है. 
 
भारत पर टैरिफ के निशाने पर?

अमेरिकी सीनेट से पास होने वाला ये बिल अब प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां ट्रंप की पार्टी यानी रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है. यहां से पास होने के बाद बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए जाएगा और पास होने के बाद ये कानून बन जाएगा. टैरिफ को लेकर अमेरिकी संसद में ये कार्यवाही ऐसे समय पर हो रही है, जब भारत और अमेरिका की ट्रेड डील पर बातचीत फाइनल राउंड में है. दिल्ली में अमेरिका के विशेष दूत सर्जियो गोर ने कहा था कि ट्रेड डील पर 99 फीसदी काम पूरा हो चुका है और कभी भी इसका ऐलान हो सकता है. यह बिल अमेरिका को भारत पर दबाव बनाने का एक मौका जरूर देगा. 

यूएस सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल, जिन्होंने इस बिल पर ट्रंप के करीबी लिंडसे ग्राहम के साथ काम किया था, उन्होंने सीनेट में कहा, 'आज राष्ट्रपति जेलेंस्की यूक्रेन से देख रहे हैं और पुतिन मॉस्को से देख रहे हैं. मुझे लगता है कि लिंडसे ग्राहम भी देख रहे होंगे. आज हम यूक्रेन के लोगों से कहते हैं- आप अकेले नहीं हैं और आज हम व्लादिमीर पुतिन से कह रहे हैं- आप यूक्रेन पर कब्जा नहीं कर पाएंगे.'

ट्रंप को टैरिफ में बदलाव करने की गुंजाइश

इस बिल में राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ में बदलाव करने की गुंजाइश मिलती है. USTR दर निर्धारण का विवेकाधिकार पहला दबाव बिंदु है. अगर वो चाहे तो इसे 100 फीसदी टैरिफ से नीचे ला सकती है या राष्ट्रीय हित के आधार पर राष्ट्रपति की छूट का इस्तेमाल कर सकती है. हर180 दिन में इस बिल का पुनर्मूल्यांकन किया जाएगा.

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