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नए साल के बीच चीन ने ताइवान पर किया बड़ी कार्रवाई का एलान, क्या अपने इस पड़ोसी देश पर कब्जा कर लेगा ड्रैगन?

China Reunification with Taiwan: चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग नए साल के मौके पर देश को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने चीन के साथ ताइवान के एकीकरण की बात कही, और अपने इरादे स्पष्ट किए. उनके इस ऐलान के बाद पूर्वी एशिया में हलचल छाया हुआ है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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नए साल के बीच चीन ने ताइवान पर किया बड़ी कार्रवाई का एलान, क्या अपने इस पड़ोसी देश पर कब्जा कर लेगा ड्रैगन?

China President Xi Jinping

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China Taiwan: रूस-यूक्रेन और इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के बाद अब एक और नई जंग की आहट हो रही है. इसबार ये स्थिति चीन और ताइवान के बीच हो सकती है. दरअसल चीन और ताइवान के बीच एक लंबे अरसे से तनाव के हालात हैं. अब नए साल के मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक बडा बयान दिया है. वो नए साल के मौके पर देश को संबोधित कर रहे थे, इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन के संग ताइवान के एकीकरण को अब कोई नहीं बाधित कर सकता है. उन्होंने ताइवान को भी अपने इरादों को लेकर आगाह किया है, साथ ही इस एकीकरण की प्रक्रिया को लेकर अपनी मंशा जताई है. शी जिनपिंग के इस बयाननुमा कार्रवाई से ताइवान के लोगों के सिर पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं. साथ ही पूर्वी एशिया में अस्थिरता की भी आशंका जताई जा रही है.

क्या है पूरा मामला?
चीन हमेशा से ताइवान को अपना क्षेत्र बताता है. ताइवान का दूसरा नाम चीनी ताइपे भी है. दूसरे विश्वयुद्ध और चीन पर कम्युनिस्ट शासन के आने से पहले ताइवान भी चीन का ही हिस्सा हुआ करता था. चीन में कम्युनिस्ट शासन के आने के बाद वहां लोकतंत्र समर्थक और साम्यवादी के मुखालिफ लोगों ने ताइवान द्वीप पर जाकर एक नए देश की नींव रखी थी.

अमेरिका समेत कई बड़े पश्चिमी देश साल 1971 तक ताइवान को ही मुख्य चीन मानते रहे. यहां तक कि यूएन के सुरक्षा परिषद में भी चीन के तौर पर ताइवान ही अगुवाई करता था, लेकिन 1971 के बाद कम्युनिस्ट चीन यानी 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' को ही यूएन और दुनियाभर से मुख्य चीन का दर्जा मिल गया. चीन की कम्युनिस्ट सरकार हमेशा से ताइवान को 'पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' का ही हिस्सा मानती रही है. अब दुनियाभर में लोगों को ये डर है कि आने वाले सालों में चीन ताइवान को भी तिब्बत की तरह ही अपने कब्जे में न कर ले. वहीं ताइवान का पक्ष है कि वहां के लोगों का भविष्‍य सिर्फ वही तय करेंगे.

ताइवान को  भारत और अमेरिका का साथ 
चीन की ओर से ताइवान को डराने के लिए पिछले महीने उससे सटे इलाकों में जमकर सैन्य अभ्यास किए गए. चीन कई बार चेतावनी दे चुका है कि ताइवान को कब्जे में करने के लिए उसे बल प्रयोग करना पड़े वो उसमें भी कोई कसर नहीं छोड़ेगा. वहीं भारत और यूएस जैसे विश्व के कई सारे देश एक स्वतंत्र राष्ट्र के तौर पर ताइवान की संप्रभुता के पक्षधर हैं, और इसका समर्थन करते हैं.

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