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चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि बिना नियमों वाली दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफिक लाइट वाला चौराहा, जहां अफरा-तफरी और अव्यवस्था लगभग तय है. निष्पक्षता और न्याय हर कोई चाहता है और अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रविवार (13 सितंबर) को कहा कि BRICS को सप्लाई चेन सुरक्षित रखने और एक बड़ा एकीकृत बाजार बनाने के लिए उभरते बाजारों और 'ग्लोबल साउथ' के साथ अपने करीबी रिश्तों का लाभ उठाना चाहिए. जिनपिंग ने ट्रेड, मैन्युफैक्चरिंग, इन्वेस्टमेंट और टेक्नोलॉजी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 5 सूत्रीय पहल का भी प्रस्ताव रखा है.
जिनपिंग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए संगठन के सदस्य देशों के नेताओं से 'ग्लोबल साउथ के लिए एकता के जरिए मजबूती का एक नया अध्याय' लिखने की दिशा में काम करने की अपील की और कहा कि 'जिसकी लाठी उसी की भैंस' वाली सोच को बहुत पहले ही त्याग दिया जाना चाहिए था. उनके टारगेट पर सीधे तौर पर अमेरिका था क्योंकि उसने हाल ही में ईरान पर हमला किया था, जोकि चीन के करीबी देशों में से एक है और उसका तेल का सबसे बड़ा खरीदार भी है.
चीनी राष्ट्रपति ने कहा, 'बिना नियमों वाली दुनिया वैसी ही है जैसे बिना ट्रैफिक लाइट वाला चौराहा, जहां अफरा-तफरी और अव्यवस्था लगभग तय है. निष्पक्षता और न्याय हर कोई चाहता है और अंतरराष्ट्रीय नियम सभी देशों को मिलकर बनाने चाहिए.'

उन्होंने कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के देशों को मिलकर अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन की रक्षा करनी चाहिए, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों - जैसे संप्रभु समानता, आंतरिक मामलों में दखल न देना और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान - की सुरक्षा करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी पर लागू हों. चीनी राष्ट्रपति ने दोहरे मापदंडों को छोड़ने की जरूरत बताया. उनकी इन टिप्पणियों को पश्चिमी ताकतों की ओर इशारा माना जा रहा है.
जिनपिंग ने कहा, 'सभी देश, चाहे उनका आकार, ताकत या संपन्नता कुछ भी हो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं.' चीनी राष्ट्रपति ने कहा, 'ग्लोबल साउथ के देशों को बहुपक्षवाद का झंडा बुलंद रखना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और भूमिका को बनाए रखना चाहिए, सुधार लाने और कार्यक्षमता बढ़ाने में बहुपक्षीय संस्थाओं का समर्थन करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए.' जिनपिंग ने विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की भी अपील की.
चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने ब्रिक्स सहयोग को बढ़ाने के लिए पांच-सूत्रीय पहल का प्रस्ताव किया जो एक इन्क्लूसिव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्ट्रक्चर बनाने, ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को एक्सेसेबल बनाने, डिजिटल इंडस्ट्री के संबंधों को मजबूत करने, इंटेलिजेंट मैन्युफैक्चरिंग को आगे बढ़ाने और साइंस-टेक्नोलॉजी के विकास के लिए एक जॉइंट पहल पर केंद्रित है.
1- पहली पहल के बारे में जिनपिंग ने कहा कि चीन BRICS-AI ओपन सोर्स कम्युनिटी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा. इसका उद्देश्य 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल' को विकसित करने और उनके इस्तेमाल में सहयोग को बढ़ावा देना, विशेषकर एआई कॉन्फ्रेंस और ट्रेनिंग कोर्सेस आयोजित करना और एक ओपन एआई इकोसिस्टम तैयार करना है.

2- जिनपिंग ने ट्रेड और इन्वेंस्टमेंट को ईजली एक्सेसेबल बनाने के दूसरे पहल के संदर्भ में कहा कि चीन ब्रिक्स स्पेशल इकोनॉमिक जोन पार्टनरशिप करने का प्रस्ताव करता है, जिसके तहत देश एक 'इंटेलिजेंट पोर्टल' बना सकते हैं. नीतियों में कॉर्डिनेशनल कर सकते हैं और सभी के विकास के लिए एक नया रास्ता तैयार कर सकते हैं.
3- चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि तीसरी पहल डिजिटल इंडस्ट्री के क्षेत्र में होगी. उन्होंने कहा, 'चीन ब्रिक्स डिजिटल इकोसिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म बनाने पर जोर देगा और डिजिटल स्किल डेवलेपमेंट ट्रेनिंग, टेक्निकल एक्सचेंज और इंडस्ट्रियल सिनर्जी जैसे काम करेगा, ताकि मिलकर डिजिटल इकोनॉमी का विकास किया जा सके.'
4- जिनपिंग ने कहा कि चौथा कदम हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग बढ़ाना होगा. उन्होंने कहा, 'चीन स्मार्ट कारखानें बनाने और स्टैंडर्ड एंड रूल्स तैयार करने में ब्रिक्स के सदस्य देशों की मदद और साथ मिलकर मैन्युफैक्चरिंग में बदलाव और उसे बेहतर बनाने को बढ़ावा देने के लिए तैयार है.'

5- चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि 5वीं पहल साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में होगी. उन्होंने कहा, 'चीन इंजीनियर्स की जॉइंट ट्रेनिंग और इलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की आपसी मान्यता के लिए एक ब्रिक्स इंजीनियर ट्रेनिंग अलायंस बनाने का प्रस्ताव रखता है. चीन साइंटिस्ट और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन के लिए एक ब्रिक्स युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम भी शुरू करेगा, ताकि हाई क्वालिटी वाले और मेधावियों को तैयार किया जा सके.'
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