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ब्रिटेन की स्पेशल फोर्स का खुफिया डेटा चीन पहुंचा! रॉयल नेवी के ड्रोन कैमरे ने कैसे किया खेल?

ब्रिटेन के सैन्य उपकरणों में चीनी पुर्जों की मौजूदगी का मामला सामने आया है. मार्च 2026 में शामिल किए गए K3 स्काउट ड्रोन के कैमरे चीन के सर्वर पर डेटा भेज रहे थे.

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ब्रिटेन की स्पेशल फोर्स का खुफिया डेटा चीन पहुंचा! रॉयल नेवी के ड्रोन कैमरे ने कैसे किया खेल?

ब्रिटेन के सैन्य उपकरणों में चीनी पुर्जे पाए गए हैं. (AI इमेज)

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  • ब्रिटेन की नेवी ने 'K3 स्काउट' ड्रोन का एक बेड़ा तैनात किया था
  • इन ड्रोन्स में लगे कैमरों में चीन में बने पार्ट लगे थे
  • चीन के एक सर्वर पर डेटा भेज रहे थे कैमरे

ब्रिटेन की रॉयल नेवी और एलीट स्पेशल फोर्सेज का सीक्रेट डेटा चुपके से चीन पहुंच रहा था. ये डेटा स्पेशल फोर्सेज द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन्स के कैमरों के जरिए चीन को ट्रांसफर हो रहा था. सामने आया है कि रॉयल नेवी के सर्विलांस ड्रोन में ऐसे कैमरे लगे थे जिनमें चीन में बने पार्ट्स थे. इन कैमरों में जो भी रिकॉर्ड हो रहा था. ये कैमरे चीन के एक पते पर डेटा भेज रहे थे. 

क्या है पूरा मामला?

ब्रिटिश समाचार पत्र द टेलीग्राफ की एक विशेष रिपोर्ट के बाद यह मामला सुर्खियों में आया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ब्रिटेन की नौसेना ने इस साल मार्च में 12 मिलियन यूरो (लगभग 130 करोड़ रुपये) की की लागत से 'K3 स्काउट' ड्रोन का एक बेड़ा तैनात किया था. ये ड्रोन ब्रिटिश रक्षा फर्म क्रैकेन टेक्नोलॉजी ग्रुप ने सप्लाई किए थे.

क्रैकेन ने ड्रोन के लिए कैमरे किसी थर्ड-पार्टी सप्लायर से खरीदे थे. काफी समय तक ये ड्रोन निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने का अपना काम करते रहे. लेकिन ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के नियमित साइबर सुरक्षा मूल्यांकन के दौरान पाया गया कि कैमरों के अंदर चीन में बने कंपोनेंट्स लगे थे. ये उपकरण एक चीनी सर्वर या IP एड्रेस से जुड़े हुए थे.

जांच करने पर पता चला कि  K3 स्काउट ड्रोन चीन के एक IP एड्रेस पर 'हार्टबीट' सिग्नल भेज रहे थे. इस बात का पता चलने पर ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय में हड़कंप मच गया और मंत्रालय को कैमरों की इंटरनेट कनेक्टिविटी हटानी पड़ी. हालांकि ब्रिटेन के अधिकारियों का कहना है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि संवेदनशील सैन्य जानकारी या रक्षा मंत्रालय के सिस्टम तक किसी ने पहुंच बनाई या उन्हें विदेश भेजा गया. 

इस खुलासे ने ब्रिटेन की सैन्य सप्लाई चेन की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. ये भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या चीनी तकनीक स्पेशल फोर्स द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बेहद संवेदनशील डेटा तक भी पहुंच गई है? 12 मिलियन पाउंड का यह ड्रोन बेड़ा मार्च से इस्तेमाल में है.  

क्या होता है हार्टबीट सिग्नल?

हार्टबीट कम्युनिकेशन एक स्वचालित सिग्नल होता है जो सर्वर को सूचित करता है कि डिवाइस ऑनलाइन है और ठीक से काम कर रहा है. चिंता इसलिए भी जताई जा रही है क्योंकि इन ड्रोन्स का इस्तेमाल फारस की खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा से जुड़े ब्रिटिश अभियानों के परीक्षण और अभ्यास के लिए किया जा रहा था. 

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