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बेल्जियम के पीएम ने फ्री ट्रेड के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए भी देशों के लिए अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की जरूरत का भी बचाव किया. उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यूरोप नहीं चाहता कि महत्वपूर्ण आर्थिक निर्भरताएं दबाव बनाने का साधन बनें.
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार (03 सितंबर, 2026) को नई दिल्ली से चीन पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने चीनी डंपिंग और बीजिंग पर यूरोप की बढ़ती आर्थिक निर्भरता को कबूल किया. वेवर ने बताया कि भारत ने इन जोखिमों के बारे में पहले भी चेतावनी दी थी, लेकिन हमने उनकी बात नहीं सुनी. नई दिल्ली में CII के एक कार्यक्रम में बोलते हुए बेल्जियम के पीएम ने कहा कि सालों तक विदेशी उत्पादन क्षमता को अपनी इंडस्ट्री को कमजोर करने और ऐसी निर्भरता पैदा करने की अनुमति देने के बाद यूरोप की आंखें खुल गई हैं.
उन्होंने कहा, 'यूरोप के लिए ये बीते साल एक कड़वी सच्चाई का खुलासा साबित हुए हैं. बहुत लंबे समय तक यूरोप देखता रहा कि अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लागत से कम दामों पर हमारे बाजारों में कैसे बेचा जा रहा है. कैसे उसके औद्योगिक आधार को कमजोर किया जा रहा है और जानबूझकर निर्भरताएं बढ़ाई जा रही हैं ताकि उनका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा सके.'
चीन का नाम लिए बिना डी वेवर ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि किस देश ने यूरोप के खिलाफ अपने आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा, 'इस प्रथा से सबसे अधिक लाभ उठाने वाला देश यहां से बहुत दूर नहीं हैष यह एक ऐसा पड़ोसी है जिसे आप सभी जानते हैं.'
डी वेवर ने कबूल किया कि भारत ने यूरोपीय देशों से पहले इस समस्या की पहचान कर ली थी. उन्होंने कहा, 'भारत ने इसे हमसे पहले देख लिया था और उन्होंने हमें चेतावनी भी दी थी।, लेकिन हमने उनकी बात नहीं मानी, लेकिन अब हम अपने निष्कर्ष निकाल रहे हैं.'
बेल्जियम के पीएम ने फ्री ट्रेड के प्रति प्रतिबद्ध रहते हुए भी देशों के लिए अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की जरूरत का भी बचाव किया. उन्होंने कहा, 'स्वार्थ की रक्षा करना उस भरोसे को कायम रखने के लिए आवश्यक है जिस पर मुक्त व्यापार निर्भर करता है. यह अवधारणा तभी विश्वसनीय होती है जब देश न तो भोला हो और न ही अपने मूलभूत हितों से समझौता करने को तैयार हो. भरोसा आपसी सम्मान पर टिका होता है.'
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यूरोप नहीं चाहता कि महत्वपूर्ण आर्थिक निर्भरताएं दबाव बनाने का साधन बनें. उन्होंने कहा, 'हम किसी के दबाव में आना पसंद नहीं करते. हम नहीं चाहते कि निर्भरताओं को हमारे खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए.'
डी वेवर 2 से 4 सितंबर तक दो दिवसीय आधिकारिक भारत दौरे पर हैं. इससे पहले, भारत और बेल्जियम ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर करके रक्षा सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डी वेवर ने वैश्विक भू-राजनीतिक वातावरण के मद्देनजर संबंधों को मजबूत करने के लिए व्यापार और निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों, हाई टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टरों को प्रमुख चालक के रूप में पहचाना था.
साल 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, चीन और यूरोप के बीच करीब 759 अरब यूरो यानी करीब 75 लाख करोड़ रुपये का कारोबार है. यूरोप चीन को करीब 200 अरब यूरोप का निर्यात करता है, जबकि 560 अरब यूरो का सामान खरीदता है. इस तरह यूरोपीय यूनियन का व्यापार घाटा करीब 360 अरब यूरो है. ईयू का चीन से आयात उसके कुल आयात का करीब 22.3 फीसदी है. 2025 में चीन ईयू का सबसे बड़ा आयात का सोर्स रहा.
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