Advertisement

Explainer: एक लकवाग्रस्त मौलवी, कैसे बना ईरान का सबसे ताकतवर इंसान? जानिए

ईरान और इज़राइल के बीच तनातनी चरम पर है. इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुलेआम कह चुके हैं . "अगर खामेनेई मारे जाते हैं तो जंग खत्म हो जाएगी." दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ और इज़राइल को ‘कैंसर ट्यूमर’ कहते हैं जिसे काटकर फेंकना जरूरी है. आखिर कौन हैं ये खामेनेई, जिनसे पूरा वेस्ट डरता है? 

Latest News
Explainer: एक लकवाग्रस्त मौलवी, कैसे बना ईरान का सबसे ताकतवर इंसान? जानिए

Ayatollah Ali Khamenei

Add DNA as a Preferred Source

ईरान और इज़राइल के बीच तनातनी चरम पर है. इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू खुलेआम कह चुके हैं . "अगर खामेनेई मारे जाते हैं तो जंग खत्म हो जाएगी." दूसरी ओर, ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई, अमेरिका को ‘बड़ा शैतान’ और इज़राइल को ‘कैंसर ट्यूमर’ कहते हैं जिसे काटकर फेंकना जरूरी है. आखिर कौन हैं ये खामेनेई, जिनसे पूरा वेस्ट डरता है? 


मौलवी के घर जन्मे, धार्मिक माहौल में पले 

19 अप्रैल 1939, ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी के घर जन्मे खामेनेई 8 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे. 4 साल की उम्र में कुरान और अरबी पढ़ना शुरू किया. स्कूल में तेज़ थे, पर बचपन में जब मौलवी की पोशाक पहनते तो साथी बच्चे उनका मज़ाक उड़ाते. 

 बचपन से ही बगावत की चिंगारी 

‘सेल नम्बर 14’ नामक आत्मकथा में खामेनेई लिखते हैं कि कैसे 1955 में मुहर्रम पर फिल्में और पार्टियों पर पाबंदी हटाई गई तो उनमें विरोध की भावना जगी. यहीं से उनकी धार्मिक सोच राजनीतिक विरोध में बदलने लगी. 

 
धर्म बना राजनीति का हथियार 

1960 के दशक में खामेनेई पर रुहोल्ला खोमैनी का गहरा प्रभाव पड़ा. खोमैनी ‘विलायत-ए-फकीह’ यानी धर्मगुरुओं की हुकूमत का पक्षधर थे. खामेनेई ने खोमैनी के विचारों को मस्जिदों से आम जनता तक पहुंचाया और सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाई. 

 
मौलवी से राष्ट्रपति तक का सफर 

1979 में इस्लामिक क्रांति आई और शाह की सत्ता गिर गई. खामेनेई क्रांतिकारी परिषद का हिस्सा बने, फिर उप-रक्षामंत्री, और IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड) बनाने में मुख्य भूमिका निभाई. ये वही संगठन है जो आज ईरान की सबसे ताकतवर फौज है. 


बम से उड़ा देने की कोशिश

1981 में टेप रिकॉर्डर में छिपे बम से खामेनेई को उड़ाने की कोशिश हुई. वह बुरी तरह घायल हुए उनका दायां हाथ लकवाग्रस्त हो गया और एक कान से सुनना बंद हो गया. लेकिन उन्होंने कहा, "अगर मेरा दिमाग और जीभ काम करे, तो हाथ की ज़रूरत नहीं." 
 

प्रधानमंत्री की मौत के बाद राष्ट्रपति बने 

प्रधानमंत्री राजाई की हत्या के बाद देश संकट में था. क्रांतिकारियों ने खामेनेई को ही देश का राष्ट्रपति चुना और यहीं से वो सत्ता की ऊंचाइयों पर पहुंचे. 


खोमैनी की मौत के बाद बने सर्वोच्च नेता 

1989 में खोमैनी की मौत के बाद खामेनेई को ईरान का सुप्रीम लीडर बना दिया गया. वो पद, जो आज भी उनके पास है. वे धार्मिक, सैन्य और राजनीतिक रूप से सर्वोच्च शक्ति हैं. आज उनकी एक बात पूरे ईरान को हिला देती है. 

यह भी पढ़ें: America Iran Attack: डोनाल्ड ट्रंप का वार प्लान तैयार, ईरान पर गिर सकता है कहर, बस आखिरी ऑर्डर का इंतजार

 क्यों इज़राइल और अमेरिका उनकी जान के पीछे पड़े हैं? 

खामेनेई खुलेआम इज़राइल को मिटाने की बात करते हैं, अमेरिका को इस्लाम का दुश्मन मानते हैं, और ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को ‘आत्मरक्षा का अधिकार’ कहते हैं. यही वजह है कि वेस्ट उन्हें सबसे बड़ा खतरा मानता है. 

 


 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement