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गगनयान मिशन के लिए ऑस्ट्रेलिया में बनेगा नया स्टेशन... एंथनी अल्बनीज का ऐलान, यहां कैसे काम करेंगे ISRO के साइंटिस्ट?

ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी सेक्टर में मिलकर काम करने का फैसला किया है. हम कोकोस कीलिंग द्वीप में एक अस्थाई स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाने के लिए सहमत हैं, जो भारत के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम, गगनयान को सपोर्ट करेगा.

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गगनयान मिशन के लिए ऑस्ट्रेलिया में बनेगा नया स्टेशन... एंथनी अल्बनीज का ऐलान, यहां कैसे काम करेंगे ISRO के साइंटिस्ट?

गगनयान मिशन के लिए ऑस्ट्रेलिया के कोकोस कीलिंग आईलैंड में बनेगा अस्थाई ट्रैकिंग टर्मिनल (Image Source: ANI)

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भारत के स्पेस मिशन गगनयान में ऑस्ट्रेलिया नई कड़ी बनने जा रहा है. भारत के पहले ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम के लिए ऑस्ट्रेलिया अपने कोकोस कीलिंग  द्वीप समूह में एक अस्थाई ट्रैकिंग स्टेशन स्थापित करेगा. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार (9 जुलाई, 2026) को पीएम नरेंद्र मोदी के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की है.

कैसे गगनयान मिशन में भारत की मदद करेगा ऑस्ट्रेलिया?
अल्बनीज ने कहा, 'दोनों देशों ने अंतरिक्ष और टेक्नोलॉजी सेक्टर में मिलकर काम करने का फैसला किया है. हम कोकोस कीलिंग द्वीप में एक अस्थाई स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाने के लिए सहमत हैं, जो भारत के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट प्रोग्राम, गगनयान को सपोर्ट करेगा.'

भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिनमें स्पेस सेक्टर भी शामिल है. उन्होंने कहा, 'कोकोस द्वीप में ट्रैकिंग टर्मिनल बनाए जाने के अलावा कुछ और कदम उठाए जाने पर भी चर्चा हुई है. पीएम अल्बनीज ने कई और क्षेत्रों में भी सहयोग को बढ़ाने के संकेत दिए हैं.' कोकोस ट्रैकिंग टर्मिनल के जरिए गगनयान के शुरुआती चार मिशनों की निगरानी और ट्रैकिंग से भारत को सहयोग मिलेगा.

गगनयान के मुख्य पैराशूट का सफल परीक्षण
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान के क्रू मॉड्यूल के मुख्य पैराशूट का मंगलवार को सफल परीक्षण किया. मध्य प्रदेश के श्योरपुर हवाई वितरण अनुसंधान और विकास संस्थापन (ADRDI) ड्रॉप जोन में यह टेस्ट किया गया. इसका मकसद गगनयान जी1 मिशन में ज्यादा से ज्यादा संभावित भार की स्थिति में मुख्य पैराशूट की मजबूती और डिजाइन को परखना था. इसके लिए एक मुख्य पैराशूट और ‘डमी’ भार से युक्त एक सिम्युलेटेड असेंबली को इंडियन एयरफोर्स के आईएल-76 विमान से 2.5 किलोमीटर की ऊंचाई से गिराया गया.

अलग होने पर एक ड्रोग पैराशूट खोला गया, फिर मुख्य पैराशूट खोला गया, जिससे पेलोड की गति धीमी होकर सुरक्षित टर्मिनल गति पर आ गई. इसरो ने कहा कि इस परीक्षण से यह विश्वास बढ़ा है कि गगनयान के पहले मानव मिशन (जी-1) में मुख्य पैराशूट प्रणाली प्रभावी ढंग से काम करेगी. गगनयान के क्रू मॉड्यूल में चार अलग-अलग तरह के 10 पैराशूट लगे हैं.

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