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पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम नेता की हत्या, आखिर क्यों इस समुदाय को बनाया जा रहा निशाना?

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अहमदिया मुस्लिम नेता मिर्जा सफदर महमूद की हत्या के बाद धार्मिक असहिष्णुता पर चिंताएं बढ़ गई हैं. जानिए यह हमला क्यों चिंताजनक है.

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पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम नेता की हत्या, आखिर क्यों इस समुदाय को बनाया जा रहा निशाना?

पाकिस्तान में अहमदिया नेता की हत्या, AI Photo

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  • पंजाब के मंडी बहाउद्दीन में 65 वर्षीय अहमदिया नेता मिर्जा सफदर महमूद की गोली मारकर हत्या.
  • यह हमला पूरी तरह से धार्मिक असहिष्णुता और नफरत से प्रेरित था.
  • आईएचआरसी ने पाकिस्तान सरकार से त्वरित न्यायिक जांच और सुरक्षा की मांग की है.


Ahmadiyya Leader Killed Pakistan: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से एक बेहद दुखद और चिंताजनक खबर सामने आई है. वहां के मंडी बहाउद्दीन जिले में अहमदिया मुस्लिम समुदाय के एक स्थानीय नेता, मिर्जा सफदर महमूद की गोली मारकर हत्या कर दी गई है.

इस घटना के बाद कराची स्थित इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (IHRC) ने तुरंत न्याय और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है. यह मुद्दा इस समय काफी चर्चा में है, क्योंकि इसे किसी आपसी रंजिश का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित 'लक्षित हमला' माना जा रहा है. 

मिर्जा सफदर महमूद की कैसे हुई हत्या?

यह दर्दनाक घटना पंजाब प्रांत के मंडी बहाउद्दीन शहर की है. स्पेनिश मीडिया आउटलेट 'अतालायर' की एक रिपोर्ट के अनुसार, 65 वर्षीय मिर्जा सफदर महमूद जब अपनी स्थानीय अहमदिया इबादतगाह की तरफ जा रहे थे, तभी रास्ते में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई.

घटना के तुरंत बाद अहमदिया समुदाय के प्रतिनिधियों ने बताया कि मिर्जा सफदर महमूद का किसी भी व्यक्ति के साथ कोई व्यक्तिगत विवाद या निजी दुश्मनी नहीं थी. इससे यह साफ संकेत मिलता है कि उनकी हत्या पूरी तरह से धार्मिक असहिष्णुता से प्रेरित एक लक्षित हमला थी. मृतक मिर्जा सफदर के परिवार में उनकी पत्नी और दो बच्चे हैं. घटना के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार और दफन के लिए रबवाह शहर ले जाया गया, जहां उनकी अंतिम रस्में पूरी की गईं.

यह हमला क्यों चिंताजनक है?

इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (IHRC) ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है. संगठन का कहना है कि मिर्जा सफदर महमूद की हत्या को कोई एक अकेली या अलग-थलग घटना मानकर खारिज नहीं किया जा सकता. यह हमला पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ लंबे समय से फैलाई जा रही नफरत, भड़काऊ बयानबाजी और लगातार मिल रही धमकियों के बीच हुआ है.

मंडी बहाउद्दीन जिले में पिछले कुछ हफ्तों से अहमदिया समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने और हिंसा के लिए उकसाने की घटनाएं काफी तेजी से बढ़ी हैं. वहां के कुछ स्थानीय धार्मिक नेताओं ने सार्वजनिक मंचों से इस समुदाय के लोगों को खुलेआम धमकियां दी थीं. इन धमकियों में अहमदिया समुदाय से जुड़े एक पुलिस अधिकारी को जान से मारने की बात और अहमदिया महिलाओं को निशाना बनाने की बातें भी शामिल थीं.

क्या पहले भी हुए हैं ऐसे हमले?

मंडी बहाउद्दीन जिले में अहमदिया समुदाय के लोगों को निशाना बनाए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है. 8 जून 2024 को इसी जिले के सदुल्लाहपुर इलाके में दो सशस्त्र हमले हुए थे, जिसमें अहमदिया समुदाय के दो सदस्यों की अलग-अलग हमलों में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी. यह दोहराव साफ दर्शाता है कि इस क्षेत्र में अहमदिया समुदाय के खिलाफ हिंसा की जड़ें गहरी हो चुकी हैं और वहां का माहौल लगातार असुरक्षित बनाया जा रहा है.

मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों की क्या मांग है?

इस गंभीर घटना के बाद इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमेटी (IHRC) ने मांग की है कि मिर्जा सफदर महमूद की हत्या की तुरंत, निष्पक्ष और पारदर्शी न्यायिक जांच कराई जाए. हत्यारों के साथ-साथ उन लोगों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए जो समाज में सांप्रदायिक नफरत फैला रहे हैं और लोगों को हिंसा के लिए उकसा रहे हैं.

इसके साथ ही,  पंजाब प्रांत में अहमदिया समुदाय के लोगों को भविष्य में होने वाले ऐसे घृणा अपराधों से बचाने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था की जाए. आईएचआरसी ने पाकिस्तान सरकार को याद दिलाया है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) चार्टर और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों के तहत यह पाकिस्तान की कानूनी जिम्मेदारी है कि वह अपने देश के हर नागरिक के जीवन, निजी सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करे.
 

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