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रिपोर्ट्स की मानें तो अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से काम-धंधा सब चौपट हो गया है. बेरोजगारी बढ़ रही है और खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं.
डीएनए हिंदी: अफगानिस्तान में तालिबान शासन लागू हो चुका है और पूरा देश भुखमरी के चपेट में है. वहां हालात ऐसे हो चुके हैं कि मासूम बच्चों की भूख मिटाने की जगह उन्हें नींद की दवा देकर सुलाया जा रहा है. तालिबान शासन की वजह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी किसी तरह की मदद नहीं मिल रही है. भूख और बेकारी इस हद तक पांव पसार चुकी है कि लोग अपने अंग तक बेचने को तैयार हैं. बेटियां बेची जा रही हैं...यह किसी एक शहर या इलाके की बात नहीं बल्कि पूरे देश में यही हाल है.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अफगानिस्तान में तालिबानी शासन आने के बाद से काम-धंधा सब चौपट हो गया है. बेरोजगारी बढ़ रही है और खाने-पीने के लाले पड़ गए हैं. हालात ऐसे हैं कि लोग पूरी तरह लाचार हो चुके हैं. अपने भूख से तड़पते बच्चों को देखकर रोने के अलावा उनके पास कोई चारा नहीं है. कुछ अफगानी लोगों ने तो कैमरे पर बातचीत में भी कहा कि उनके पास न काम और न खाना. भूख लगती है तो वे नींद की दवा खाते हैं. उनके पास बच्चों की भूख मिटाने के लिए भी साधन नहीं है. वे उन्हें नींद की गोली खिलाकर सुलाने को मजबूर हैं.
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बता दें कि 15 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान में दोबारा तालिबान की सत्ता ताकत में आई. बस उसी दिन से मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा. देश में गरीबी और भुखमरी के चलते लोग अपनी छोटी मासूम बच्चियों की शादी करवा रहे हैं ताकि उन्हें भूखे रहने से बचाया जा सके. संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम के मुताबिक अफगानिस्तान की आधी आबादी खाद्य असुरक्षा का सामना कर रही है. वहीं 95 फीसदी आबादी के पास खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है. इस देश में पांच से कम उम्र के 10 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हो चुके हैं.
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