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शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को भारत दौरे पर रहेंगे. चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से इसकी पुष्टि कर दी गई है. हालांकि इस दौरान उनकी पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं, इसको लेकर बयान में कुछ नहीं बताया गया है.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें ब्रिक्स समिट में शामिल होने नई दिल्ली आएंगे. चीनी राष्ट्रपति की पिछले सात सालों में यह पहली यात्रा होगी. इससे पहले शी जिनपिंग 2019 में भारत दौरे पर आए थे. 11-12 अक्टूबर को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में पीएम मोदी और जिनपिंग भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे.
शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को भारत दौरे पर रहेंगे. चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से इसकी पुष्टि कर दी गई है. हालांकि इस दौरान उनकी पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होगी या नहीं, इसको लेकर बयान में कुछ नहीं बताया गया है, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि दोनों देशों के प्रमुख ब्रिक्स समिट के इतर मीटिंग कर सकते हैं, जिसमें भारत-चीन संबंधों की स्थिति, LAC पर हालात, कारोबार और आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों देशों में कारोबार को अभी भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें नियमों के कारण निवेश में रुकावट, वीजा में देरी, औद्योगिक उपकरणों पर प्रतिबंध शामिल हैं, जो राजनयिक प्रगति और आर्थिक संबंधों के बीच का अंतर दिखाते हैं.
चीन और भारत के बीच 1962 में युद्ध हुआ था, जिससे दोनों देशों के बीच रिश्ते बिगड़ गए. 2020 में गलवान झड़प में 20 भारतीय और चार सीनी सैनिकों की मौत के बाद फिर हालात बिगड़ गए. हालांकि बीते कुछ दिनों में सीमा पर हालात सुधरे हैं. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी सीमा पर तनाव को कम करने वाले डेलीगेशन को लीड कर रहे हैं. पिछले साल पीएम मोदी की SCO समिट के दौरान चीन यात्रा के बाद हालात तेजी से सुधरे, जिसमें पीएम मोदी और शी जिनपिंग दोनों ने ही कहा कि वो एक दूसरे के प्रतिस्पर्धी नहीं साझेदार हैं. अमेरिका की टैरिफ रणनीति के बाद चीन और भारत ने रिश्ते तेजी से सुधारे.
रॉयटर्स ने शंघाई की फुदान यूनिवर्सिटी के साउथ एशिया एक्सपर्ट और नई दिल्ली में चीनी दूतावास के पूर्व राजनयिक लिन मिनवांग से बात की. उन्होंने कहा, 'चीन निश्चित रूप से संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है, लेकिन हम इंतजार कर रहे हैं कि भारत किस हद तक उन्हें बेहतर बनाने के लिए तैयार है.' हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी नाटकीय प्रगति की संभावना नहीं है.
नई दिल्ली स्थित ऑब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन थिंक थैंक के उपाध्यक्ष हर्ष पंत ने कहा कि दोनों देशों के बीच विश्वास की भारी कमी है. उन्होंने कहा, 'चीन के पास आर्थिक ताकत है. इसका इस्तेमाल करने और एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में उभरने का चीन के पास अच्छा मौका है, खासकर तब जब दोनों देश अमेरिका की व्यापार नीतियों से प्रभावित हैं.'
भारत ने 2020 में गलवान संघर्ष के बाद चीन में निवेश पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए थे, जिन पर इसी साल मार्च महीने में कुछ ढील दी थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स, पूंजीगत सामान और सौर ऊर्जा प्लेटें शामिल थीं. रॉयटर्स के मुताबिक, भारत कुछ उद्योगों में भारतीय और चीनी कंपनियों के बीच संयुक्त उद्यम पर भी विचार कर रहा है. दिल्ली की ओर से कुछ महत्वपूर्ण चीनी परियोजनाओं को मंजूरी भी दी है, जिनमें डिक्सन टेक्नोलॉजी और चीनी मोबाइल कंपनी निर्माता वीवो के साथ के बीच मैन्युफेक्चरिंग शामिल है.
भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें रद्द कर दी गई थीं, जिन्हें पिछले साल ही शुरू किया गया है. इसके अलावा भारत की ओर से चीनी कारोबारियों के लिए वीजा प्रक्रियाओं में ढील दी गई है. वहीं चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'उन भारतीय नागरिकों को वीजा जारी किया जाता है, जिन्हें चीन जाने की वास्तविक आवश्यकता है.
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग चौथी बार भारत की यात्रा पर आ रहे हैं. 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारतमंडपम में आयोजित होने वाले ब्रिक्स समिट में शामिल होंगे. उनके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी ब्रिक्स में शामिल होने दिल्ली पहुंच रहे हैं.
-सितंबर 2014 में वे पहली बार आधिकारिक तौर पर भारत आए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की थी.
-जिनपिंग की दूसरी यात्रा 2016 में हुई थी, जब वो ब्रिक्स समिट में शामिल होने गोवा पहुंचे थे.
-चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की तीसरी यात्रा डोकलाम विवाद के बाद हुई थी. अक्टूबर 2019 को वह महाबलीपुरम में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए भारत आए थे.
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