Advertisement

ब्रिटेन आ जाएगा रूस की हाइपरसोनिक न्यूक्लियर मिसाइलों की रेंज में! पुतिन की इस रणनीति से डरा यूरोप

अगर रूसी पनडुब्बियां बेयर गैप को पार कर अटलांटिक में पहुंच गईं तो उन्हें ढूंढना बेहद मुश्किल हो जाएगा. यह लगभग 400 मील चौड़ा रास्ता रूस के लिए आर्कटिक से नॉर्थ अटलांटिक तक जाने का जरिया है.

Latest News
ब्रिटेन आ जाएगा रूस की हाइपरसोनिक न्यूक्लियर मिसाइलों की रेंज में! पुतिन की इस रणनीति से डरा यूरोप

यूरोप के कुछ नेताओं ने आशंका जताई है कि रूस बेयर गैप पर कब्जा कर सकता है. (प्रतीकात्मक AI तस्वीर)

Add DNA as a Preferred Source

Vladimir Putin's  Arctic chokehold tactic: यूरोप रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक खास रणनीति से फिर डरा हुआ है. आर्कटिक के एक रणनीतिक समुद्री रास्ते को पुतिन का नया हथियार बताया जा रहा है.  जानकारों का कहना है कि अगर इस अहम रास्ते पर रूस का कब्ज़ा हो जाता है तो ब्रिटेन हाइपरसोनिक न्यूक्लियर हमलों की चपेट में आ सकता है. 'बेयर गैप' के नाम से मशहूर यह लगभग 400 मील चौड़ा रास्ता रूस के लिए आर्कटिक से नॉर्थ अटलांटिक तक जाने का जरिया है. 

नॉर्वे के रक्षा मंत्री ने जताई चिंता

'द टाइम्स' से बात करते हुए नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने कहा है कि रूस आर्कटिक में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. सैंडविक ने कहा है कि रूस नाटो देशों के पास  समुद्री इलाकों में पनडुब्बियां तैनात कर रहा है. ये इलाका कोला प्रायद्वीप के पश्चिमी हिस्से में है जहां रूस का ज़्यादातर न्यूक्लियर हथियार भंडार है. यहीं पर रूस की नेवी का नॉर्दर्न फ्लीट (उत्तरी बेड़ा) तैनात है. 

नॉर्वे के रक्षा मंत्री टोरे सैंडविक ने कहा है कि रूस इस इलाके पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है. ऐसा वह अपने न्यूक्लियर हथियारों को सुरक्षित रखने और अटलांटिक तक नौसेना की पहुंच को  बेहतर बनाने की रणनीति के तहत कर सकता है. टोरे सैंडविक ने आगे जो कहा है वो चौंकाने वाला था. उन्होंने कहा कि  अगर पुतिन स्कैंडिनेविया के उत्तरी हिस्से पर कब्ज़ा कर लेते हैं, या बेयर गैप को नियंत्रित कर लेते हैं तो ब्रिटेन के लिए एक बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा. अगर पनडुब्बियों को ट्रैक नहीं किया जा सकता तो ब्रिटेन हाइपरसोनिक न्यूक्लियर मिसाइलों की रेंज में होगा. 

'बेयर गैप' रूस और यूरोप के लिए कितना अहम हैं?

'बेयर गैप' उत्तरी ध्रुव (Arctic Ocean) में स्थित एक अहम रणनीतिक समुद्री गलियारा है. यह नार्वे के उत्तरी हिस्से और र्वे के ही स्वालबार्ड द्वीपसमूह के सबसे दक्षिणी द्वीप 'बेयर आइलैंड' के बीच करीब 650 किलोमीटर में फैला जलक्षेत्र है. ह छोटा सा दिखने वाला समुद्री रास्ता रूस और यूरोप के बीच सैन्य संतुलन और सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है. 

नार्दर्न फ्लीट को रूस का सबसे शक्तिशाली नौसैनिक बेड़ा कहा जाता है.  रूस की परमाणु पनडुब्बियों और युद्धपोतों को आर्कटिक से निकलकर अटलांटिक महासागर में प्रवेश करने के लिए बेयर गैप से होकर ही गुजरना पड़ता है. रूस अपनी बैलिस्टिक मिसाइल परमाणु पनडुब्बियों को आर्कटिक के ठंडे समुद्र में छिपाकर रखता है. नाटो की घुसपैठ से बचाने के लिए रूस बेयर गैप पर अपना कड़ा प्रभाव बनाए रखना चाहता है. रूस की इच्छा आर्कटिक पर पूर्ण नियंत्रण की भी है. इसलिए वह इस क्षेत्र पर पकड़ बनाए रखने के लिए बेयर गैप को एक बफर जोन की तरह देखता है.

दूसरी तरफ रूस की पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए नॉर्वे और अन्य नाटो देश इस संकरे रास्ते का उपयोग करते हैं. अगर रूसी पनडुब्बियां बेयर गैप को पार कर अटलांटिक में पहुंच गईं तो उन्हें ढूंढना बेहद मुश्किल हो जाता है. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस बेयर गैप पर पूरी तरह हावी हो जाता है, तो उसके युद्धपोत और पनडुब्बियां यूरोप के बेहद करीब पहुंच जाएंगी. इस पर नियंत्रण करके रूस ऐसी जगह पहुंच सकता है जहां से ब्रिटेन, डेनमार्क और नीदरलैंड जैसे देश रूस की लंबी दूरी की क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलों की सीधी रेंज में आ जाएंगे. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement