Advertisement

अमेरिका करता है जापान की सुरक्षा, फिर क्यों छठी पीढ़ी का फाइटर जेट बनाना चाहता है टोक्यो?

चीन, रूस और उत्तर कोरिया के साथ क्षेत्रीय तनावों की वजह से जापान की नई रक्षा नीति जवाबी हमलों पर केंद्रित हुई है. जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनी शांतिवादी नीति से हटकर लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें हासिल कतर रहा है. वो अपना डिफेंस खर्च जीडीपी का दो फीसदी तक बढ़ा रहा है.  

Latest News
अमेरिका करता है जापान की सुरक्षा, फिर क्यों छठी पीढ़ी का फाइटर जेट बनाना चाहता है टोक्यो?

चीन को लाल आंखें दिखाएगा जापान! (फोटो- AI)

Add DNA as a Preferred Source
  • 1960 के समझौते के तहत अमेरिका, जापान की सुरक्षा करता है. 
  • जापान की वायुसेना के पास अमेरिका के 5वीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट हैं. 
  • ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर जापान छठी पीढ़ी के फाइटर प्रोग्राम (GCAP) में शामिल हुआ है. 

अमेरिका, रूस और चीन ने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स डेवलेप किए हैं और अपने-अपने सहयोगी देशों को दिए हैं. इसके अलावा साउथ कोरिया अपना KF-21, तुर्किए अपना KAAN और भारत अपना AMCA प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. कई देशों ने अब छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स पर भी काम शुरू कर दिया है. चीन अपना चेंगदू J-36 और शेनयांग J-50 डेवलेप कर रहा है. अमेरिका ने छठी पीढ़ी के फाइटर जेट की टेस्टिंग शुरू कर दी है, लेकिन इसका प्रोटोटाइप परीक्षण 2028 में शुरू होने वाला है. यूरोपीय देश फ्रांस, जर्मनी और स्पेन मिलकर फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) बना रहे हैं. इसी प्रोजेक्ट में भारत के शामिल होने की बात भी चल रही है. रूस ने एक बार फिर चर्चित मिग-41 के बारे में बात शुरू कर दी है, जो छठी पीढ़ी का फाइटर जेट प्रोग्राम होगा. इसके अलावा इटली और यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर जापान भी ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) पर काम कर रहा है. कनाडा भी इस प्रोग्राम में हाल ही में पर्यवेक्षक के तौर पर शामिल हुआ है. इसका टारगेट 2035 तक छठी पीढ़ी के फाइटर जेट का प्रोडक्शन शुरू करना है. 
 
सवाल ये उठ रहा है कि अमेरिका ने अपने सबसे खतरनाक फाइटर जेट्स F-35 जापान को दिए हैं और जापान की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी एक तरह से अमेरिका ही उठा रहा है. आज की तारीख में भी वहां पर अमेरिका के करीब 55 हजार जवान तैनात हैं तो फिर जापान को छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स की जरूरत क्यों पड़ी और आखिर वो अपने करीब 75 सालों से सबसे भरोसेमंद रक्षा सहयोगी से दूर क्यों जा रहा है, जिसने उसके साथ सिक्योरिटी पैक्ट साइन किया था?

जापान ने अमेरिका को दी सैनिक रखने की अनुमति

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जापान अमेरिकी सैन्य विमानों पर काफी हद तक निर्भर रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है कि उसने सिर्फ बने हुए फाइटर जेट ही खरीदे. वो अगर किसी भी तरह के हथियार की डील करता है तो उसका देश में जॉइंट प्रोडक्शन भी कराता है. जापान और अमेरिका ने सितंबर 1951 में एक सिक्योरिटी ट्रीटी पर हस्ताक्षर किए, जिससे मित्र देशों का कब्जा खत्म हो गया. इसने अमेरिकी सेनाओं को जापान की रक्षा के लिए वहां रहने की अनुमति दी. युद्ध के बाद जापान के संविधान के अनुच्छेद 9 के तहत देश को युद्ध छेड़ने या आक्रामक  सैन्य बलों को बनाए रखने से प्रतिबंधित किया गया था, जिससे अमेरिकी सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई.

जापान के पास कितने F-35?

साल 1960 आते-आते इस डील को अपडेट किया गया. इसमें अमेरिका ने जापान पर हमले की स्थिति में उसकी रक्षा करने पर सहमति जताई और बदले में जापान ने अमेरिकी ठिकानों को बने रहने देने पर सहमति दी. आज भी यही संधि लागू है. अमेरिका के सुरक्षाकर्मी टोक्यो में तैनात हैं. जापान एयरफोर्स ने अमेरिका को 5वीं पीढ़ी के 147 F-35 फाइटर जेट्स की डील की थी, जिनमें से 55 उसकी सेना में शामिल हो चुके हैं. इस ऑर्डर में 105 F-35A हैं और 42 F-35B (शॉर्ट टेक-ऑफ और वर्टिकल लैंडिंग) वेरिएंट शामिल हैं. इनमें से कई जेट्स को जापान में ही डेवलेप किया जा रहा है. 

हालांकि, चीन, रूस और उत्तर कोरिया के साथ क्षेत्रीय तनावों की वजह से जापान की नई रक्षा नीति जवाबी हमलों पर केंद्रित हुई है. जापान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अपनी शांतिवादी नीति से हटकर लंबी दूरी की मारक क्षमता वाली मिसाइलें हासिल कतर रहा है. वो अपना डिफेंस खर्च जीडीपी का दो फीसदी तक बढ़ा रहा है.  

GCAP में क्यों शामिल हुआ जापान?

अब सवाल उठता है कि जापान ने F-35 होने के बावजूद  GCAP  में शामिल होना क्यों चुना? इसकी वजह ये है कि भले ही जापान, अमेरिका के सबसे करीबियों में से एक हो और उसके F-35 जैसे खास फाइटर जेट्स का इस्तेमाल करता हो, लेकिन वो F-35 को अपने दम पर नहीं बना सकता क्योंकि सॉफ्टवेयर अपडेट, सोर्स कोड तक पहुंच और हथियारों को इंटीग्रेट करने के लिए अमेरिकी सरकार और लॉकहीड मार्टिन की मंजूरी जरूरी है क्योंकि जेट के मिशन सिस्टम और डेटा नेटवर्क केंद्रीय रूप से नियंत्रित होते हैं. इसलिए जापान को अमेरिका पर ही निर्भर रहना पड़ेगा. बता दें कि अमेरिका ने सिर्फ इजरायल को F-35 में स्वदेशी हथियारों को इंटीग्रेड करने की मंजूरी दी है. 
 
जापान हमेशा से धीरे-धीरे एक स्वतंत्र शक्ति बनना चाहता था. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद बदली हुई विदेश नीति, ट्रेड टैरिफ और अमेरिका फर्स्ट जैसे विजन की वजह से उसके सहयोगी अब वाशिंगटन पर सवाल उठाने लगे हैं कि क्या वो लंबे समय तक यूएस पर निर्भर रह सकते हैं. जापान के पास टेक्निकल रिसोर्सेज मौजूद हैं और वो बराबरी वाले साझेदारों के साथ काम करना चाहता है. 
 
क्या है GCAP प्रोग्राम, कौन-सी कंपनियां कर रहीं काम?

ग्लोबल कॉम्बैट एयर प्रोग्राम (GCAP) का मैनेजमेंट एजविंग कंपनी द्वारा किया जा रहा है, जोकि BAE सिस्टम्स (ब्रिटेन), लियोनार्डो (इटली) और JAIEC (जापान) का जॉइंट वेंचर हैं. इस प्रोग्राम के लिए एजविंग कंपनी के साथ करीब 6 अरब डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया है. फिलहाल ये शुरुआती चरण में है, जहां इंजीनियरिंग और प्रोटोटाइपिंग पर काम चल रहा है. साल 2027 के आखिरी में ब्रिटेन में इसके पहले प्रोटोटाइप के उड़ान भरने की संभावना है. इसको 2035 तक सेना में शामिल करने का टारगेट रखा गया है. 

 ये भी पढ़ें- एक पर हमला, सब पर हमला... क्या है मक्का रक्षा समझौता? जिसे डोनाल्ड ट्रंप ने बता दिया साहसी कदम

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement