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अब तक धीमे प्रोपेलर वाले गेरान-2 और गेरान-3 ड्रोन्स को यूक्रेन आसानी से इंटरसेप्ट कर लेता था. लेकिन गेरान-4 और गेरान-5 की तेज गति के कारण यूक्रेन इन्हें हवा में आसानी से नहीं पकड़ पा रहा है.
Jet-Powered Geran strike drones: रूस ने यूक्रेन पर हमले तेज करने के लिए जेट-संचालित गेरान-4 और गेरान-5 ड्रोन के उत्पादन को प्रति माह लगभग 3,000 यूनिट तक बढ़ा दिया है. युक्रेन की सैन्य खुफिया एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि रूस के तातारस्तान क्षेत्र स्थित येलाबुगा में इन जेट-संचालित हमलावर ड्रोन का बड़े पैमाने पर निर्माण हो रहा है. जेट इंजन से संचालित होने वाले ये ड्रोन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हैं. आइये जानते हैं गेरान-4 और गेरान-5 की ताकत और खासियत.
मिलिटार्नी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मई-जुलाई 2026 से ही येलाबुगा में नए कारखानों का निर्माण शुरू हो गया है ताकि उत्पादन क्षमता को और बढ़ाया जा सके. रूस ने पुराने जेट मॉडल गेरान-3 का उत्पादन रोक दिया है और अब अपना पूरा ध्यान अधिक आधुनिक गेरान-4 और गेरान-5 पर केंद्रित कर रहा है.
रूस अब तक गेरान-3 का इस्तेमाल कर रहा था जिसमें चीन में बने JT80 इंजन लगे थे. लेकिन इसकी ताकत कम थी. गेरान-4 ड्रोन में 160 kgf वाला नया टर्बोजेट इंजन लगाया गया है. इसकी रफ्तार 350 से 500 किमी/घंटा तक पहुंचती है. गेरान-4 का अधिकतम टेक-ऑफ वजन 450 किग्रा है. इसकी रेंज 850 किमी तक है और यह कम से कम 50 किग्रा का वारहेड ले जा सकता है.
गेरान-5 इस सीरीज का सबसे घातक और खतरनाक अटैक ड्रोन है. गेरान-5 की डिजाइन भी अलग है और ये दिखने में किसी छोटी क्रूज मिसाइल जैसा लगता है. इसमें 90 किग्रा का भारी वारहेड फिट किया जा सकता है. गेरान-5 की की मारक क्षमता लगभग 1,000 किमी की है. गेरान-5 को लड़ाकू विमानों से हवा में भी लॉन्च किया जा सकता है.
यूक्रेन के साथ युद्ध शुरू होने के बाद काफी समय तक रूस ईरान में बने 'शाहेद' ड्रोन का इस्तेमाल करता रहा. रूस ने लंबी दूरी के हमलों और यूक्रेन की एयर डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए ईरान के शाहेद ड्रोन का देश में ही निर्माण भी किया. बाद में शाहेद का ही रूसी वर्जन 'गेरान' विकसित किया गया.
रूस धीरे-धीरे 'गेरान' ड्रोन की रेंज बढ़ाता गया. इसके अलावा इस युद्ध में बड़े पैमाने पर छोटे FPV ड्रोन भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं. ड्रोन हमलों से निपटने के लिए यूक्रेन ने कई तरह के 'इंटरसेप्टर ड्रोन' विकसित किए हैं. अब तक धीमे प्रोपेलर वाले गेरान-2 और गेरान-3 ड्रोन्स को यूक्रेन आसानी से इंटरसेप्ट कर लेता था. लेकिन गेरान-4 और गेरान-5 की तेज गति के कारण यूक्रेन इन्हें हवा में आसानी से नहीं पकड़ पा रहा है.
बदली हुई रणनीति के तहत रूस का लक्ष्य अब अपने कुल हमलावर ड्रोन बेड़े में जेट-संचालित ड्रोन की हिस्सेदारी बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करना है. रूस अब एक साथ सैकड़ों की संख्या में ड्रोन दाग रहा है.