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पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी की एयरफोर्स भारत के मुकाबले कहां, तीनों मिलकर दे पाएंगे टक्कर?

भारतीय वायुसेना के पास राफेल, सुखोई-30, MiG-29 और स्वदेशी तेजस जैसे फाइटर जेट हैं, जो खतरनाक BVR (Meteor-Astra) और लॉन्ग रेंज मिसाइलों (ब्रह्मोस-स्कैल्प) से लैस हैं. इसके अलावा भारत 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA पर भी काम कर रहा है.

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पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी की एयरफोर्स भारत के मुकाबले कहां, तीनों मिलकर दे पाएंगे टक्कर?

मुस्लिम नाटो बनाने जा रहे देशों से भारत की तुलना! (फोटो क्रेडिट- AI)

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  • पाकिस्तान की वायुसेना की ताकत F-16 और JF-17 फाइटर जेट्स हैं.
  • तुर्किए अपनी ड्रोन टेक्नोलॉजी की वजह से खास है.
  • सऊदी के पास अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स और यूरोफाइटर टायफून के बेड़े हैं. 
  • भारत के पास सुखोई-30 और राफेल का बेड़ा है. इसके साथ ही डिफेंस सिस्टम काफी मजबूत है.

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने मक्का सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर पर किए हैं, जिसके मुताबिक एक देश पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा. यह एक तरह से मुस्लिम देशों के नाटो की तरह ही काम करेगा. जहां पाकिस्तान भारत और इजरायल से डरा हुआ है, सऊदी-तुर्किए के साथ ऐसा नहीं है. सऊदी के तो भारत और इजरायल दोनों के साथ ही अच्छे रिश्ते हैं, लेकिन उसे ईरान, यमन के हूती और इराक के मिलिशिया से खतरा लग रहा है.वहीं तुर्किए को ईरान, ग्रीस, सीरिया और इजरायल से डर बना हुआ है. पाकिस्तान से लिहाज से देखा जाए तो अगर वो भारत के साथ युद्ध करता है और इसमें इन दोनों देशों का समर्थन भी मिले तो भारत के मुकाबले में ये कहां ठहरेंगे?

जहां सऊदी अरब फाइटर जेट्स और एयर डिफेंस में मजबूत है. वहीं तुर्किए स्वदेशी टेक्नोलॉजी और भविष्य की संभावना में आगे हैं. वो 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स KAAN पर काम भी कर रहा है और अमेरिका के साथ F-35 की डील भी करना चाहता है, जिसकी ट्रंप ने हरी झंडी भी दे दी है. जबकि पाकिस्तान के पास बियॉन्ड विजुअल रेंज कॉम्बेट और J-10C, JF-17 जैसे फाइटर जेट्स हैं. हालांकि पहले तो पाकिस्तान की गलतफहमी है कि उसे भारत के खिलाफ सऊदी का साथ मिलेगा. बावजूद इसके अगर  भारतीय वायुसेना की इनके साथ तुलना की जाए तो तीनों के मुकाबले वो अकेली ही मजबूत स्थिति में है.

पाकिस्तान की वायुसेना कितनी मजबूत?

पाकिस्तान के पास अमेरिकी F-16, चीन का J-10C और JF-17 फाइटर जेट्स हैं, जोकि लगभग सभी चौथी पीढ़ी के हैं. उसके पास अगर मिसाइल की बात करें तो PL-15 और PL-15E हवा से हवा में मार कर सकने वाली मिसाइल है. एयर डिफेंस सिस्टम की बात करें तो वो चीन HQ-9P इस्तेमाल करता है. उसके पास स्वीडन का Saab 2000 और चीनी ZDK-03 Karakoram जैसे अर्ली वॉर्निंग सिस्टम हैं.

अमेरिकी F-16 तुर्किए एयरफोर्स की रीढ़ 

तुर्किए की वायुसेना की रीढ़ माने जाते हैं- F-16. इसके अलावा वो यूरोफाइटर टायफून भी इस्तेमाल करता है. साथ ही 5वीं पीढ़ी के स्वदेशी KAAN पर भी काम कर रहा है. हालांकि अबतक उसके KAAN ऑपरेशनल नहीं हैं. वो अमेरिकी AIM-120 AMRAAM और AIM-9 Sidewinder मिसाइलें भी इस्तेमाल करता है. एयर डिफेंस सिस्टम रूसी S-400 है, जिसे वो जल्दी ही अपने बेड़े से हटाएगा क्योंकि F-35 के लिए अमेरिका की ओर से यही शर्त रखी गई है. इसके अलावा तुर्किए ने अपना HİSAR और SIPER भी डेवलेप किया है. तुर्किए के पास Boeing 737 AEW&C और E-7T Peace Eagle अर्ली वॉर्निंग सिस्टम भी हैं. 
 
सऊदी के पास कौन-से लड़ाकू विमानों का बेड़ा?

सऊदी अरब के पास अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स का बेड़ा है. इसके अलावा यूरोफाइटर टायफून भी हैं. सऊदी के पास अमेरिकी AIM-120 AMRAAM मिसाइलों का जखीरा है.बीते साल ही अमेरिका ने सऊदी के साथ ही एक हजार AMRAAM मिसाइलों की डील की है. सऊदी का डिफेंस सिस्टम काफी मजबूत है, जोकि अमेरिका का पेट्रियट और THAAD है. अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की बात करें तो उसके पास अमेरिकी E-3A Sentry AWACS की फ्लीट है. 

भारत की हवाई क्षमता के बारे में जानिए

भारतीय वायुसेना के पास राफेल, सुखोई-30, MiG-29 और स्वदेशी तेजस जैसे फाइटर जेट हैं, जो खतरनाक BVR (Meteor-Astra) और लॉन्ग रेंज मिसाइलों (ब्रह्मोस-स्कैल्प) से लैस हैं. इसके अलावा भारत 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट AMCA पर भी काम कर रहा है, जिसे 2030 तक भारतीय वायुसेना को देने का प्लान है.  इसके साथ ही भारत के पास एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (AWACS) के रूप में फॉल्कन और नेत्र हैं. एयर डिफेंस सिस्टम रूस का S-400, बराक-8 और आकाश हैं, जिनका भारत सरकार ने सुदर्शन चक्र नाम दिया है. भारत ने अमेरिका से 31 MQ-9B के लिए भी कॉन्ट्रैक्ट किया है.

भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत कोई एक फाइटर जेट या मिसाइल नहीं है, बल्कि इन सभी को एक नेटवर्क्ड एयर वॉर आर्किटेक्चर में जोडना है. जैसे AWACS के बाद रडार, फाइटर जेट, BVR मिसाइल, एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और फिर ड्रोन.

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