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Hangor class submarine: एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन से लैस पाकिस्तान की पहली हंगोर क्लास पनडुब्बी कराची बंदरगाह पहुंच गई है. ऐसी 7 और सबमरीन पाकिस्तान नेवी को आने वाले सालों में मिलेंगी.
Pakistan Hangor-class submarine: पाकिस्तान अपनी नौसेना की ताकत चीन की मदद से बढ़ा रहा है. चीन के साथ हुए समझौते के तहत बनी पाकिस्तान की पहली 'हंगोर' क्लास पनडुब्बी हाल ही में कराची बंदरगाह पहुंची है. पाकिस्तानी नौसेना के आधुनिकीकरण में इस सबमरीन के शामिल होने को एक अहम पड़ाव माना जा रहा है. पाकिस्तान की पहली हैंगोर-क्लास पनडुब्बी गुरुवार, 11 जून को कराची में नौसेना के डॉकयार्ड पर पहुंची.
साल 2015 में पाकिस्तान ने चीन के साथ आठ 'हंगोर' क्लास डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक पनडुब्बियों के लिए एक डील साइन की थी. इस सौदे के तहत शुरुआती चार पनडुब्बियां चीन में 'चाइना शिपबिल्डिंग एंड ऑफशोर इंटरनेशनल कंपनी' में बनाई जा रही हैं. बाकी चार पनडुब्बियों का निर्माण पाकिस्तान में 'कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स' में 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर' के जरिए किया जा रहा है.
पाकिस्तान नेवी के लिए चीन द्वारा बनाई गई डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन्स चीन की टाइप 039B (युआन-क्लास) पर आधारित हैं. इनमें लंबे समय तक पानी के नीचे रहने के लिए एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) जैसी तकनीक है. पाकिस्तान 5 अरब डॉलर खर्च कर के चीन से ऐसी 8 पनडुब्बियां खरीद रहा है ताकि भारत की नौसेनिक ताकत के खिलाफ अपनी क्षमता बढ़ाई जा सके.
AIP सिस्टम से लैस होने के कारण इस सबमरीन को बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर नहीं आना पड़ता जिससे यह दुश्मन की नजर में नहीं आती. हमला करने के लिए इसमें छह 533mm टॉरपीडो ट्यूब लगे हैं. इन ट्यूब्स से भारी टॉरपीडो और एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइलें लॉन्च किया जा सकता है. इसे सबमरीन से लॉन्च होने वाली बाबर-3 क्रूज मिसाइल दागने में भी सक्षम बनाया गया है जिसकी रेंज 450 km है. पाकिस्तान की बाबर क्रूज मिसाइल परमाणु वॉरहेड भी ले जा सकती है इसलिए हंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान को डिटरेंस भी प्रदान करती हैं.
पिछले 5 दशकों में भारत और पाकिस्तान की समुद्री सेनाओं के बीच का अंतर बहुत बढ़ गया है. इस दौरान भारत ने 'ब्लू-वॉटर' क्षमता हासिल की है. इंडियन नेवी के पास एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां और देश में बने डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट का बड़ा बेड़ा है. भारत के पास मज़गांव डॉक और गार्डन रीच जैसे शिपयार्ड वाला मजबूत इंडस्ट्रियल बेस भी है. भारत में अब हर तरह के युद्धपोत देश में ही बनाए जा रहे हैं.
इसके उलट पाकिस्तान की कहानी अलग है. पाकिस्तान नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए में मुख्य रूप से चीन और तुर्की पर निर्भर है. पाकिस्तान चीन से 'हंगोर-क्लास' पनडुब्बियां ले रहा है और तुर्की से 'बाबर-क्लास' कार्वेट हासिल कर रहा है. फंड की कमी भी पाकिस्तानी नौसेना के सामने एक बड़ी चुनौती है. पाकिस्तान के रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से सेना और वायु सेना को दिया जाता है.