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पाकिस्तान की वायुसेना के पास इस समय सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट JF-17 थंडर ही है, जो उसकी भविष्य की रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. उसने हाल ही में अजरबैजान के साथ 40 JF-17 लड़ाकू विमानों के लिए 4.6 अरब डॉलर की डील की थी. अब उस पर इन विमानों की डिलीवरी का भारी दबाव है.
पाकिस्तान की एयरफोर्स फाइटर जेट्स की भारी कमी से जूझ रही है. पीएएफ फिलहाल दशकों पुराने फ्रांसीसी मिराज III/V और चाइनीज F-7 जैसे फाइटर जेट्स के बेड़ों पर निर्भर है, जिसे वो जल्दी से जल्दी बदलना चाहती है. उसके पास एक ऑप्शन भी है- JF-17 ब्लॉक III, जिसे पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) ने चीन के साथ मिलकर बनाया है, लेकिन दिक्कत आ रही है JF-17 के प्रोडक्शन में. यही पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
पाकिस्तान के लिए इस समय सिर्फ फाइटर जेट्स की गिनती ही महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि पीएएफ को पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाना और साथ ही कुल स्क्वाड्रन की संख्या को बरकरार बनाए रखना दोनों ही चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. सार्वजनिक आंकड़ों के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान एयरफोर्स करीब 21 फाइटर स्क्वाड्रन संचालित कर रहा था. ऐसा अनुमान है कि इस बेड़े में करीब 75 अमेरिकी F-16, 20 चाइनीज J-10CE, 156 चीन-पाकिस्तान का जॉइंट प्रोडक्ट JF-17 थंडर, 49 फ्रांसीसी मिराज III, 37 मिराज V और और 53 चाइनीज F-7 जेट्स शामिल हैं.
हालांकि फ्लाइट ग्लोबल की 2025 की रिपोर्ट पाकिस्तान एयरफोर्स की समस्या को उजागर करती है. इसके मुताबिक, पाकिस्तान के पास 230 से ज्यादा पुराने लड़ाकू विमान हैं, इनमें मिराज और F-7 का जिक्र है, जिन्हें तुरंत बदलने की जरूरत है. ये रिपोर्ट पाकिस्तान के उस दावे की पोल खोलती है, जिसमें वो कहता है कि पीएएफ के पास 150 से ज्यादा JF-17 फाइटर जेट्स हैं. हकीकत तो ये है कि 2025 में पाकिस्तानी वायुसेना में सिर्फ 23 JF-17 ब्लॉक III ऑपरेशनल हैं, जबकि 27 अन्य का ऑर्डर दिया गया था.
पाकिस्तान की वायुसेना के पास इस समय सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट JF-17 थंडर ही है, जो उसकी भविष्य की रक्षा रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसमें मॉडर्न KLJ-7A एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार इंटीग्रेटेड है, जो बेहतर मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के खिलाफ हाई रजिस्टेंट कैपेसिटी देता है. इसके अलावा JF-17 में कुछ चीनी हथियारों को भी इंटीग्रेट किया गया है. हाल ही में जारी तस्वीरों में फाइटर जेट को चीन की PL-15 लंबी दूरी की बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और PL-10 इमेजिंग-इन्फ्रारेड मिसाइलों से लैस दिखाया गया है.
फाइटर जेट्स के पुराने बेड़े को बदलने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की आवश्यकता होती है. पाकिस्तान ने PAC कामरा में स्थित घरेलू रिपेयर यूनिट के जरिए 1960 के दशक के मिराज III और V विमानों के बेड़े को उड़ान भरने लायक बना रखा है. हालांकि उसके लिए पुर्जों की उपलब्धता और टेक्नोलॉजी भी बड़ी चुनौती है.पाकिस्तान की समस्या की असली वजह उसकी प्रोडक्शन कैपेसिटी है. रक्षा मामलों से जुड़ी वेबसाइट डिफेंस डॉट इन ने सार्वजनिक स्त्रोतों का हवाला देते हुए बताया कि पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) कामरा की वार्षिक उत्पादन क्षमता 16 से 20 JF-17 विमानों के आसपास रहती है.
पाकिस्तान ने हाल ही में अजरबैजान के साथ 40 JF-17 लड़ाकू विमानों के लिए 4.6 अरब डॉलर की डील की थी. अब उस पर इन विमानों की डिलीवरी का भारी दबाव है. जब अजरबैजान ने 2025 के आखिरी में JF-17 लड़ाकू विमानों के पहले बैच को आधिकारिक तौर पर शामिल किया तो ऐसी अटकलें लगाई गई थीं कि पाकिस्तान को समय पर डिलीवरी करने के लिए अपने मौजूदा स्क्वाड्रनों से जेट निकालने पड़े होंगे. हालांकि सीरियल नंबरों के सामने आने के बाद कंफर्म हुआ कि पीएएफ ने अपने स्टॉक से जेट नहीं निकाले थे. पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स को फिलहाल अजरबैजान के लिए 40 विमानों की डिलीवरी का काम सौंपा गया है, लेकिन उसकी खुद की एयरफोर्स F-7 लड़ाकू विमान के बेड़े को बदलने के इंतजार में है और यही पाकिस्तान के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.
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