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भारतीय वायुसेना पहले तेजस Mk1A स्क्वाड्रन को राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात करेगी, जिनमें मुख्य रूप से बीकानेर का नाल एयरबेस शामिल है. यहां से पाकिस्तान की सीमा करीब 40 किलोमीटर ही है.
भारतीय वायुसेना अपने स्वदेशी तेजस Mk1A फाइटर जेट्स के बेड़े को पाकिस्तान की सीमा के पास ही तैनात करने की योजना तैयार कर रही है. अमेरिका से अब तक हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को अब तक करीब 10 GE F404-IN20 इंजन मिल चुके हैं. HAL को उम्मीद है कि इस साल के खत्म होने तक अमेरिका 20 और इंजनों की डिलीवरी कर सकता है.
अमेरिका से इंजनों की डिलीवरी की वजह से ही तेजस Mk1A को वायुसेना के बेड़े में शामिल होने में देरी हुई थी. हालांकि अब धीरे-धीरे ये रुकावट भी खत्म हो रही है. इंडियन एयरफोर्स फाइटर जेट्स की कमी से जूझ रही है, ऐसे में उसे इस फाइटर जेट की भारी जरूरत है. साल 2021 में आईएएफ ने एचएएल के साथ 83 लड़ाकू विमानों के लिए 48 हजार करोड़ की डील की थी. इसके बाद 97 और जेट के लिए अलग से ऑर्डर दिया गया, जिसके बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में 180 Mk1A विमानों की संख्या पहुंच गई है. एक तेजस Mk1A फाइटर जेट की कीमत करीब 600 करोड़ है, जिसकी स्पीड 1.8 मैक यानी आवाज की स्पीड से करीब दो गुनी होगी.
रक्षा से जुड़ी खबरों की वेबसाइट डिफेंस डॉट इन के मुताबिक, भारतीय वायुसेना पहले तेजस Mk1A स्क्वाड्रन को राजस्थान में पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात करेगी, जिनमें मुख्य रूप से बीकानेर का नाल एयरबेस शामिल है. यहां से पाकिस्तान की सीमा करीब 40 किलोमीटर ही है. अंतरराष्ट्रीय सीमा से कुछ ही दूरी पर स्थित यह रणनीतिक तैनाती युद्ध के समय में दुश्मन को जवाब देने को काफी कम कर देगी. अगर पाकिस्तान की ओर से हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया गया तो उसे तुरंत ही करारा जवाब मिलेगा. तेजस की यहां तैनाती से भारत की पश्चिमी हवाई रक्षा प्रणाली मजबूत हो जाएगी.
स्वदेशी तेजस Mk1A की एक प्रमुख विशेषता है कि रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) काफी कम है. इस जेट को दुश्मन के रडार सिस्टम द्वारा पहचानना स्वाभाविक रूस से मुश्किल है. रक्षा आकलन के मुताबिक, Mk1A का फ्रटल RCS चेंगदू J-10C की तुलना में करीब 60 फीसदी कम है, जोकि एक चाइनीज लड़ाकू विमान है, जिसे पाकिस्तान की वायुसेना में शामिल किया गया है. तेजस का पता लगाना कठिन होने के कारण, यह भारी और परंपरागत विरोधी लड़ाकू विमानों पर 'पहले ट्रैक करो, पहले शूट करो' का फायदा उठाता है.
Mk1A की स्टेल्थ क्षमता मॉडर्न इलेक्ट्रॉनिक्स और हथियारों से लैस है. यह फाइटर जेट एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और पावरफुल सेंसरों से लैस है, जो स्वदेशी उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार का इस्तेमाल करके काफी दूरी से टारगेट का पता लगा सकता है. बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) युद्ध में भारतीय जेट स्वदेशी Astra Mk1 एक्टिव रडार निर्देशित मिसाइल पर निर्भर करता है. DRDO ने हाल ही में इस मिसाइल की मारक क्षमता को 160 किलोमीटर तक बढ़ा दिया है.
तेजस पाकिस्तानी J-10C बेड़े पर BVR वॉर में भारी पड़ेगा क्योंकि चाइनीज जेट में PL-15E मिसाइल लगी हुई है, जिसकी मारक क्षमता करीब 145 किमी है. Mk1A के छोटे रडार प्रोफाइल और Astra मिसाइल की विस्तारित मारक क्षमता के कारण, एक IAF पायलट दुश्मन पर निशाना साधकर हमला कर सकता है और दुश्मन के सिस्टम द्वारा खतरे को महसूस करने से पहले ही सुरक्षित रूप से वहां से निकल सकता है.
तेजस Mk1A हल्का, फुर्तीला और मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसे रडार की पकड़ से बच निकलने के लिए डिजाइन किया गया है. राफेल-सुखोई-30MKI जैसे भारी-भरकम लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर काम करते हुए तेजस Mk1A भारत के लिए लड़ाकू विमानों की एक घातक लेयर बनाएगा, जिससे भारतीय वायुसेना जंग के मैदान में दुश्मनों पर वर्चस्व बनाए रखेगी.
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