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Government New Healthcare Norms: केंद्र सरकार ने 12% से अधिक अल्कोहल वाले कफ सिरप और टॉनिक की खुली बिक्री बंद कर दी है. अब ये दवाएं बिना डॉक्टर के पर्चे यानी प्रिस्क्रिप्शन के नहीं मिलेंगी.
देश में कफ सिरप और टॉनिक जैसी दवाओं के बढ़ते दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त कदम उठाया है. अब मेडिकल स्टोर संचालक अपनी मनमर्जी से 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं नहीं बेच सकेंगे. सरकार ने नए नियमों के तहत ऐसी सभी दवाओं की खुली बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी है.
सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' में महत्वपूर्ण संशोधन किया है. इसके तहत, मुंह से ली जाने वाली (Oral) वैसी सभी दवाएं जिनमें इथाइल अल्कोहल की मात्रा 12% से ज्यादा है और जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर (ml) से बड़ी है, उन्हें अब 'शेड्यूल H1' (Schedule H1) की श्रेणी में डाल दिया गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब इन दवाओं को काउंटर से सीधे खरीदने के दिन चले गए हैं; इन्हें लेने के लिए डॉक्टर का वैध पर्चा होना अनिवार्य होगा.

भारत के 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' के तहत आने वाला शेड्यूल H1 उन दवाओं के लिए होता है, जिनके ओवरडोज़ या गलत इस्तेमाल का खतरा सबसे अधिक रहता है. नए संशोधन के बाद फार्मासिस्टों और मेडिकल स्टोर संचालकों को निम्नलिखित नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा-
बिक्री का पूरा रिकॉर्ड: दुकानदार को एक अलग रजिस्टर मेनटेन करना होगा, जिसमें दवा खरीदने वाले मरीज का नाम, संबंधित डॉक्टर का नाम और दी गई दवा की सटीक मात्रा दर्ज करनी होगी.
The Ministry of Health and Family Welfare has notified the Drugs (Tenth Amendment) Rules, 2026, which will come into force six months after their publication in the Official Gazette. The amendment exempts oral formulations containing more than 12 per cent v/v (ethyl alcohol)… pic.twitter.com/ZszxE8S2yX
— Press Trust of India (@PTI_News) July 10, 2026
प्रिस्क्रिप्शन संभालना: इन दवाओं को केवल डॉक्टर के वैध पर्चे पर ही बेचा जा सकता है और उस रिकॉर्ड को जांच के लिए संभाल कर रखना होगा.
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अल्कोहल युक्त सिरप और टॉनिक का इस्तेमाल लंबे समय से नशे के विकल्प के रूप में धड़ल्ले से किया जा रहा था. इसके अलावा, कोडीन वाले कफ सिरप की बड़े पैमाने पर होने वाली तस्करी भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी. सबसे गंभीर बात यह है कि पिछले साल राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप के कथित इस्तेमाल से जुड़े मामलों में बच्चों की मौत की दुखद घटनाएं सामने आई थीं, जिसके बाद इन सुरक्षा मानकों को कड़ा करने की मांग लगातार उठ रही थी.
इस नियम को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया पिछले साल से ही चल रही थी. अक्टूबर 2025 में सरकार ने इसका एक शुरुआती ड्राफ्ट जारी कर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव मांगे थे. निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई आपत्ति न मिलने के बाद, सरकार ने 'ड्रग टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड' (DTAB) से अंतिम विचार-विमर्श कर इस संशोधन को हरी झंडी दे दी है. सरकार के इस कदम से न केवल दवाओं के अवैध व्यापार और नशे पर रोक लगेगी, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी.
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