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क्या है Abbott Mount का राज, क्यों आज भी 'डेथ बंगले' के खौफनाक इतिहास को भुला नहीं पाते लोग?

मोरिस मरीज को देखते ही बता दिया करते थे उसकी मौत इस तारीख को इतने बजे हो जाएगी. कहा जाता है कि उस समय ऐसी 100 से ज्यादा मौतें हुई जिनकी भविष्यवाणी डॉक्टर मोरिस ने की थी.

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क्या है Abbott Mount का राज, क्यों आज भी 'डेथ बंगले' के खौफनाक इतिहास को भुला नहीं पाते लोग?
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डीएनए हिंदी: पहाड़ों में अक्सर भूत प्रेत आत्माओं कि कहानी सुनने को मिलती है. एक तो वहां कि आबादी इतनी घनी नहीं होती और ऊपर से लोगों के घर भी कुछ-कुछ दूरी पर बने रहते हैं. ऐसे में शाम ढलते ही पसरा सन्नाटा लोगों के मन में अजीब सा डर पैदा करने लगता है. आज हम आपको डर की एक ऐसी ही कहानी सुनने जा रहे हैं.

कहानी है उत्तराखंड के एक छोटे से इलाके अब्बोट्ट माउंट (Abbott Mount) की. बता दें कि इस जगह का नाम अब्बोट्ट नाम के एक अंग्रेज व्यक्ति के नाम पर पड़ा. यहां एक 100 साल से भी ज्यादा पुराना अस्पताल है. Abandoned नाम के इस अस्पताल से सटे हुए स्टाफ क्वार्टर में उस समय ब्रिटिशर्स अपने परिवार के साथ रहते थे. हालांकि, फिर एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि लोगों ने यहां रहना तो दूर आना-जाना तक बंद कर दिया. 

क्या है अब्बोट्ट माउंट का इतिहास?  
सन 1900 की बात है. अब्बोट्ट अपने परिवार के साथ उत्तराखंड की एक सुनसान जगह पर बांगला बनाकर रहते थे. उनका यह घर बेहद खूबसूरत पहाड़ियों से घिरा हुआ था. घर के चारों ओर लगे पेड़-पौधे इस खूबसूरती में चार चांद लगा रहे थे. अब ऐसी जगह को भला कौन ही छोड़ना चाहेगा? लेकिन अब्बोट्ट ने कुछ समय बाद अपने इस बंगले को दान कर दिया. अब्बोट्ट का सपना था कि वो अपनी इस जगह पर एक अस्पताल बनवाएं ताकि पहाड़ी पर रहने वाले लोगों को उनके आसपास ही बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकें. यही वजह है कि लंदन जाने से पहले उन्होंने इस बंगले को एक चैरिटेबल हॉस्पिटल के नाम कर दिया. इस हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज, अच्छे डॉक्टर के साथ-साथ तमाम तरह की सुविधाएं मौजूद थीं. 

साल बीते, सब कुछ अच्छा चल रहा था. इस बीच मोरिस नाम के एक डॉक्टर ट्रांसफर लेकर अपने परिवार के साथ अब्बोट्ट अस्पताल पहुंचते हैं. मोरिस उस समय के नामी डॉक्टर्स में से एक थे. लोगों के बीच उनकी एक अच्छी पहचान थी. डॉ मोरिस को लेकर कहा जाता था कि उनके पास हर तरह की बीमारी का इलाज था. वह किसी भी मरीज की बीमारी को जड़ से खत्म करना जानते थे. यही वजह है कि वहां के कुछ लोग उन्हें जादूगार तो कुछ तो भगवान का दर्जा दिया करते थे. इतना ही नहीं, कहा जाता है कि डॉ मोरिस लोगों को देखकर भविष्यवाणी कर दिया करते थे कि उनकी मौत कब और कितने बजे होगी. हैरानी की बात है कि ऐसा होता भी था. 

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मोरिस मरीज को देखते ही बता दिया करते थे उसकी मौत इस तारीख को इतने बजे हो जाएगी. कहा जाता है कि उस समय ऐसी 100 से ज्यादा मौतें हुई जिनकी भविष्यवाणी डॉक्टर मोरिस ने की थी. फिर देखते ही देखते लोगों ने डॉक्टर मोरिस को आपार शक्तियों का स्वामी बना दिया. समय बीता और फिर एक दिन ऐसा भी आया जब दूसरों की मौत की भविष्यवाणी करने वाले डॉक्टर खुद चल बसे. 

इसके बाद कई अन्य डॉक्टरों ने अस्पताल की कमान संभाली. हालांकि, वे लोगों को मोरिस जैसी संतुष्टी न दे सके. मरीज अस्पताल जाते और अन्य डॉक्टरों के सामने मोरिस के गुणगान करने लगते. वहीं, जब चीजें ज्यादा बढ़ने लगीं तो नए डॉक्टर्स के मन में मोरिस को लेकर संदेह पैदा हुआ. उनके मन में सवाल आने लगे कि कोई भी डॉक्टर मरीज की मौत को लेकर एकदम सठिक भविष्यवाणी कैसे कर सकता है. यह असंभव है. बस फिर इसी संदेह के साथ नए डॉक्टरों ने मामले को लेकर छानबीन करना शुरू कर दिया.  

इस दौरान सामने आया कि डॉक्टर मोरिस एक दिन में 10-15 मरीजों को देखते थे. इन मरीजों में जिस किसी कि भी हालत सबसे गंभीर होती थी, मोरिस उसकी मौत की भविष्यवाणी कर दिया करते थे. इसके बाद उस मरीज को उठाकर हॉस्पिटल के एक कमरे में रख दिया जाता था. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस कमरे में केवल डॉक्टर मोरिस को ही जाने की इजाजत थी. बाकि कोई भी व्यक्ति कमरे के आसपास भी नहीं जा सकता था. इसके अलावा उस कमरे में जो भी मरीज गया, वह लौट कर जिंदा वासप नहीं आया.

मोरिस ने इस कमरे का नाम मुक्ति कुटीर रखा था. उनका कहना था कि मरीज को इस कमरे में ले जाने से मौत के बाद उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी. हालांकि, बाद में जब मुक्ति कुटीर की सच्चाई लोगों के सामने आई तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. 

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दरअसल, मोरिस मेडिकल की फील्ड में काफी आगे जाना चाहते थे. उनके मन में हजारों सवाल थे. इंसान का दिल धड़कता कैसे है? इंसान का दिमाग सोचता कैसे है? क्यों इंसान के दिमाग अलग-अलग होते हैं और वो क्यों एक जैसा नहीं सोचते? इस तरह के सवाल डॉ मोरिस को हमेशा घेरे रहते. बाद में पता चला कि उनके यही सवाल कई लोगों की मौत का कारण बन गए.

नए डॉक्टरों द्वारा की गई छानबीन में सामने आया कि मोरिस अपने इन सवालों का जवाब जानने के लिए लोगों के ऊपर रिसर्च किया करते थे. मोरिस मरीज की मौत की तारीख और समय बताने के बाद उसे अपनी एक डायरी में नोट करते और ठीक उसी समय वो उस मरीज को मार डालते. इधर, इस सच्चाई के सामने आने के बाद लोगों ने मोरिस का नाम डॉ डेथ रख दिया. साथ ही उनका बंगला डॉक्टर डेथ के बंगले के नाम भी जाना जाने लगा.   

धीरे-धीरे लोगों ने इस अस्पताल में आना बंद कर दिया और दूसरे अस्पतालों की और रुख करने लगे. नए डॉक्टरों के आने के बाद भी लोग उनपर यकीन न कर सके. बाद में बाते बढ़ती चली गईं और लोग अस्पताल को लेकर तरह-तरह की बातें बनाने लगे. कोई कहता कि अस्पताल से लोगों के चीखने-चिल्लाने की अवाजें आती हैं तो किसी का कहना था कि शाम ढलते ही यहां अजीब-अजीब परछाइयां दिखती हैं. इन सब घटनाओं के बाद अस्पताल को भुताहा घोषित कर दिया गया. यहां तक कि लोगों ने उस बंगले के पास मौजूद चर्च और कब्रिस्तान में भी जाना छोड़ दिया.

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जानकारी के लिए बता दें कि आज भी वह अस्पताल उसी जगह मौजूद है और वहां के लोग आज भी इस घटना को सच मानते हैं. बाद में इस जगह को बेचने कि भी कोशिश की गई लेकिन डर के चलते कोई उसे खरीदने की हिम्मत न कर सका. वहां रह रहे लोगों ने भी इस बात की पुष्टि की कि यहां पर रात के वक्त अजीब-अजीब आवाजें तो सुनाई देती हैं लेकिन किसी ने कोई परछाई आज तक नहीं देखी. 

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