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Mansi से बने Ronit Jha, मिलिए उस युवा से, जो BPSC Exam के बाद बने Bihar Police के पहले Transman दारोगा

Inspiring Story: रोनित झा की पहचान साल 2019 तक लड़की के तौर पर थी. इसके बाद उन्होंने अपनी सही पहचान समझी और सेक्स-चेंज ऑपरेशन कराने के बाद BPSC Exam में शामिल होने का निर्णय लिया.

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Mansi से बने Ronit Jha, मिलिए उस युवा से, जो BPSC Exam के बाद बने Bihar Police के पहले Transman दारोगा
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Inspiring Story: कई बार हमारे बीच कुछ लोग दोहरी जिंदगी जीते हैं. वे जो दिखते हैं, असल में वे अंदर से कुछ और ही होते हैं. जब उन्हें अपनी सही पहचान समझ आ जाती है तो एक सही फैसला उनकी जिंदगी बदल देता है. ऐसा ही कुछ बिहार के सीतामढ़ी जिले की मानसी के साथ साल 2019 में हुआ, जब उसे अहसास हुआ कि असल में वो एक लड़का है. इसके बाद मानसी ने सेक्स-चेंज ऑपरेशन कराने का फैसला लिया ताकि वह अपनी सही पहचान दुनिया को दिखा सके. इस ऑपरेशन के बाद मानसी से रोनित झा (Ronit Jha) बन गए इस युवा के लिए शुरू हुआ संघर्ष का दौर, जो पिछले साल अक्टूबर, 2024 में बिहार सरकार के BPSC Exam रिजल्ट में पास हुए युवाओं को बिहार पुलिस (Bihar Police) में सब-इंस्पेक्टर के तौर पर नियुक्ति देने की घोषणा के साथ खत्म हुआ. इस रिजल्ट में पास होने वाले रोनित झा इसके साथ ही बिहार पुलिस के पहले ट्रांसजेंडर दारोगा बन गए. इस नियुक्ति में 3 ट्रांसजेंडर चुने गए थे, जिनमें से रोनित भी एक थे.

अपने माता-पिता की इकलौती संतान
सीतामढ़ी में जन्मे रोनित अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं. उनकी पैदाइश मानसी झा के तौर पर हुई. इसी पहचान के साथ उन्होंने सीतामढ़ी में स्कूली शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए पटना का रुख किया. पटना के मगध महिला कॉलेज में उन्होंने ग्रेजुएशन में मानसी झा के तौर पर एडमिशन लिया. रोनित ने मीडिया से बातचीत में एक बार बताया था कि उन्हें बार-बार अहसास होता था कि वे महिला नहीं हैं. साल 2019 में उन्होंने अपनी इस सच्चाई को दुनिया के सामने लाने का निर्णय लिया. उन्होंने इस निर्णय की जानकारी अपने माता-पिता को दी और सेक्स-चेंज सर्जरी कराने का निर्णय लिया. उनके मात-पिता ने इस निर्णय में उनका साथ दिया और इस महंगी सर्जरी को कराने में मदद की.

स्टूडेंट लीडर से पुलिस अफसर तक
सेक्स चेंज करने के बाद मानसी से रोनित बनने के बाद उन्होंने छात्र राजनीति में भाग लेना शुरू किया. रोनित ने छात्रसंघ अध्यक्ष पद पर पहले स्वतंत्र उम्मीदवार और फिर NSUI के बैनर तले चुनाव लड़ा. अपने कैंपेन में वे खुलेआम अपने जेंडर आइडेंटिफिकेशन को लेकर बात करते थे. सबको बताते थे कि किस तरह उन्होंने पहले एक महिला मानसी झा के तौर पर पढ़ाई की. ग्रेजुएशन के बाद वे काउंसलर के तौर पर काम करने लगे. अब वे पुलिस अफसर के तौर पर सबकी समस्याएं सुलझाते हैं.

'जेंडर चेंज कराने पर लोग अजनबी हो गए, मां-बाप का उत्पीड़न किया'
रोनित को जेंडर चेंज करने के बाद बेहद संघर्ष करना पड़ा. उनका कहना है कि जो लोग गहरे जानकार थे, वे भी अजनबी की तरह व्यवहार करने लगे. वे मुझे अलग नजरिये से देखने लगे. जब भी मैं भीड़ में खड़ा होता तो लोग मुझे ऐसे देखते मानो मैं कोई अजूबा हूं. लोग मेरे माता-पिता का इस बात को लेकर मानसिक टॉर्चर करने लगे. वे उन्हें ये ताना मारते कि मैं सरकारी नौकरी पाने के लिए ट्रांससेक्सुअल बना हूं, लेकिन मेरे माता-पिता ने फिर भी मेरा साथ दिया. उन्हें मेरी वजह से बेहद उत्पीड़न सहना पड़ा.

लोगों के तानों ने दी सरकारी नौकरी के प्रयास की प्रेरणा
रोनित ने मीडिया से बताया था कि किस तरह जेंडर चेंज के कारण उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मध्यम वर्गीय परिवार से होने के कारण और लोगों की तरफ से मिलने वाले तानों के चलते उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने की प्रेरणा मिली. इसके बाद उन्होंने सरकारी नौकरी के लिए प्रयास शुरू किया. नतीजा आज वे बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर के तौर पर काम कर रहे हैं.

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