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Inspiring Story: शादी के 7 फेरे ले रहा था यूपी का कपल, बीच में ही किया ऐसा काम, जो सबके लिए बनेगा मिसाल

Inspiring Story: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के एक गांव में दूल्हे और दुल्हन ने अपनी शादी के सात फेरों के समय ही मेडिकल रिसर्च के लिए देहदान करने की घोषणा की है. दोनों की इस आधुनिक सोच वाली पहल की सभी सराहना कर रहे हैं.

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Inspiring Story: शादी के 7 फेरे ले रहा था यूपी का कपल, बीच में ही किया ऐसा काम, जो सबके लिए बनेगा मिसाल

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के इस युवा दंपती ने अपनी शादी के दिन अपना शरीर मेडिकल कॉलेज को दान करने की घोषणा की है. (फोटो-PTI)

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Inspiring Story: युवाओं की सोच जिंदगी को लेकर लगातार बदल रही है. ऐसे में पढ़े-लिखे युवा कुछ ऐसे फैसले ले रहे हैं, जो बेहद आश्चर्य में डाल देते हैं और कई बार दूसरों के लिए प्रेरणा भी बन जाते हैं. ऐसा ही एक काम उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के एक युवा कपल ने भी किया है. इटावा के खानपुर गांव के इस युवा कपल ने शादी के सात फेरों पर लिए जाने वाले सात वचनों के साथ ही एक और प्रण भी लिया है, जो दूसरों के लिए मिसाल कहा जा सकता है. दरअसल इस युवा कपल ने शादी के सात फेरों के दौरान मेडिकल रिसर्च के लिए अपनी देहदान करने की घोषणा की है. दोनों की यह घोषणा लोगों के बीच चर्चा का सबब बन गई है, जिसकी हर कोई तारीफ कर रहा है.

19 अप्रैल को हुई थी इस कपल की शादी
इटावा जिले की भरथना तहसील के खानपुर गांव के रामपाल सिंह के बेटे अतुल यादव की शादी 19 अप्रैल को निवाड़ीकलां गांव की लवी यादव से हुई है. दोनों ने शादी के दौरान जयमाला के स्टेज पर सभी को अपने देहदान के फैसले की सूचना दी. उन्होंने बताया कि मरने के बाद उनके शव सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी को दान कर दिए जाएं ताकि मेडिकल रिसर्च के जरिये लोगों की बीमारियों का इलाज तलाशने में वे योगदान दे सकें.

दूल्हा MBA तो दुल्हन ने की है BSc
अतुल यादव ने BCA करने के बाद MBA की डिग्री ली हुई है, जबकि उनकी पत्नी लवी BSc डिग्री पूरी कर चुकी हैं. अतुल फिलहाल सैफई मेडिकल यूनवर्सिटी के कंप्यूटर सर्वर डिपार्टमेंट में टेक्नीशियन के पद पर तैनात है. अतुल का कहना है कि वे मरीजों के देहदान करने के पॉजिटिव इंपेक्ट से बेहद प्रभावित थे. उन्होंने मौत के बाद अपना शरीर दान करने का निर्णय लिया और यह बात शादी से पहले ही अपनी होने वाली पत्नी लवी के साथ साझा की थी. PTI की खबर के मुताबिक, अतुल ने अपने इस निर्णय के पीछे अध्यात्म और दर्शनशास्त्र से मिले ज्ञान को कारण बताया है. उनका कहना है कि वे गीता पुराण आदित पढ़ते रहते हैं, जिससे उन्हें शरीर के नश्वर होने और आत्मा के अमर होने की जानकारी मिली. मरने के बाद जलकर नष्ट करने की बजाय उन्होंने अपने शरीर को समाज की सेवा में लगाने का निर्णय लिया. इसी कारण उन्होंने देहदान का फैसला किया, जिसमें उनकी पत्नी लवी ने भी उनका साथ देने की बात कही है. उनके पिता रामपाल यादव ने भी उनके इस फैसले को सही बताया है.

सैफई यूनिवर्सिटी ने दिया फेरों के दौरान ही प्रमाणपत्र
अतुल यादव और उनकी पत्नी के इस फैसले की सराहना सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति ने भी की है. सैफई कॉलेज के एनाटॉमी विभाग के प्रमुख डॉ. नित्यानंद श्रीवास्तव ने अतुल की शादी में पहुंचकर ही वर-वधू को आशीर्वाद के साथ शगुन के तौर पर उनके देहदान के संकल्प का प्रमाणपत्र सौंपा है. 

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