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अगर आपको पुराणों में ज्यादा यकीन नहीं तो एक और थियोरी है. इसके मुताबिक गोलगप्पे का कनेक्शन मगध काल से है.
डीएनए हिंदी: बाजार जाएं और गोल गप्पे खाए बिना लौट आएं तो कई लोगों की मार्केट विजिट पूरी नहीं होती. यह एक ऐसा स्नैक है जिसे आप कभी भी खा सकते हैं. चाहे भूख हो या ना हो एक गोल गप्पे की जगह तो बन ही जाती है. अब एक खा लिया तो फिर रुका नहीं जाता. बस इसकी यही खूबी है जो इसे हर उम्र के लोगों का पसंदीदा बनाती है. इसकी रीच अब केवल लड़कियों तक सीमित नहीं है. आप अपने आस-पास लड़कों को भी गोल गप्पे वाले के सामने हाथ फैलाए देख सकते हैं. वह स्नैक जिसने जमानेभर के हाथ में डोना पकड़ा दिया है कभी उसके इतिहास के बारे में कभी सोचा है ? बताया जाता है कि यह आज का नहीं बल्कि करीब 400 साल पुराना आइटम है. इसके इस दुनिया में आने को लेकर दो कहानियां बहुत पॉपुलर हैं. एक कहानी महाभारत से जुड़ी है और दूसरी मगध के राजा से.
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पहली बार द्रौपदी ने बनाए थे गोलगप्पे
पौराणिक कहानियों की मानें तो दुनिया में पहली बार गोलगप्पे द्रौपदी ने बनाए थे. द्रौपदी ने सास कुंती कि दिए एक टास्क की वजह से बनाए थे. कहा जाता है कि जब पांडव वनवास में थे उस दौरान कुंती ने अपनी बहु की कुशलता को परखने के लिए उसे थोड़ा सा आटा और कुछ सब्जियां दीं. कुंती ने कहा कि कुछ ऐसा बना दो जिससे सभी का पेट भर जाए. सामान इतना ही है कम में ही काम चलाना होगा. इस पर द्रौपदी ने गोल गप्पे की खोज की.
400 साल पुराना कनेक्शन
अगर आपको पुराणों में ज्यादा यकीन नहीं तो एक और थियोरी है. इसके मुताबिक गोलगप्पे का कनेक्शन मगध काल से है. करीब तीन से चार सौ साल पहले मगध के राजा ने भारत में पहली बार गोलगप्पे बनवाये थे. धीरे-धीरे यह पूरे देश में फैल गए और अलग-अलग नामों से पहचाने जाने लगे. कहीं इन्हें गोलगप्पे कहा जाता है कहीं पानी पूरी, पानी बताशा, फुचका और न जाने इसके कितने नाम हैं लेकिन स्वाद वही एक खट्टा और चटपटा.
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