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Ajab Gajab News: रिटायर्ड आर्मी अफसर पिछले 10 साल से पत्नी से अलग रह रहा था. उसका कहना है कि बेटियों ने संपत्ति उनके नाम नहीं करने पर उसे जेबखर्च के लिए भी तरसा दिया था. इसी उत्पीड़न के कारण उसने सारी दौलत मंदिर को देने का निर्णय लिया है.
Ajab Gajab News: लोग पूरी जिंदगी अपने बच्चों की सुख-सुविधाओं के लिए कमाई करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि उन्हें बच्चों के ही उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है. ऐसा ही एक मामला तमिलनाडु में सामने आया है, जहां एक रिटायर्ड आर्मी अफसर ने अपनी बेटियों के उत्पीड़न से तंग आकर करीब 4 करोड़ रुपये की संपत्ति अरुलमिगू रेंगुमबल अम्मन मंदिर को दान कर दी. उसने मंदिर के दान पात्र में अपनी प्रॉपर्टी के ऑरिजनल डॉक्यूमेंट्स डाल दिए, जिन्हें देखकर सब हैरान रह गए. अब उन डॉक्यूमेंट्स के जरिये संपत्ति को मंदिर के नाम रजिस्टर्ड कराने की तैयारी की जा रही है.
दो महीने में एक बार खोला जाता है दान पात्र
तमिलनाडु के तिरुवन्नमलाई जिले में अरानी कस्बे के करीब मौजूद अरुलमिगू रेंगुमबल अम्मन मंदिर की 11 'हुंडी' (दानपात्र) को हर दो महीने में एक बार खोला जाता है. इस दौरान हुंडी में आया दान गिना जाता है. इस बार मंगलवार (24 जून) को इन हुंडी को खोला गया तो उसमें प्रॉपर्टी के दो डॉक्यूमेंट मिले, जिनकी कीमत करीब 4 करोड़ रुपये आंकी गई है.
बचपन से मंदिर के भक्त हैं दान करने वाले रिटायर्ड आर्मी अफसर
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मंदिर में जो प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट मिले, वो एस. विजयन नाम के एक रिटायर्ड आर्मी अफसर के पाए गए हैं. विजयन केशवापुरम गांव के निवासी हैं और बचपन से इस मंदिर के भक्त हैं. विजयन ने मंदिर की हुंडी में प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट डालने के साथ ही हाथ से लिखा एक नोट भी डाला, जिस पर उन्होंने संपत्ति मंदिर के नाम ट्रांसफर करने की सहमति दी हुई है.
10 साल से अकेले रह रहे हैं विजयन
विजयन करीब 10 साल पहले अपनी पत्नी वी. कस्तूरी (56) से मतभेद हो जाने के बाद से अकेले रह रहे हैं. 65 साल के विजयन की दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की शादी चेन्नई में और दूसरी की शादी वेल्लोर में हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, विजयन को कभी अपने परिवार का साथ नहीं मिला. उल्टा उनकी बेटियां उन्हें अपनी संपत्ति उनके नाम ट्रांसफर करने के लिए उत्पीड़ित करती रहती हैं. विजयन ने द हिंदू से बातचीत में कहा कि मैं रोजाना के जेबखर्च के लिए भी मेरी बेटियों द्वारा उत्पीड़ित किया जाता हूं. मैं अपने शब्द वापस नहीं लूंगा. मंदिर के अधिकारियों से सलाह करने के बाद मैं अपनी संपत्तियों को मंदिर के नाम लीगल तरीके से ट्रांसफर कर दूंगा.
मंदिर प्रबंधन ने कही है ये बात
मंदिर के एक्जीक्यूटिव ऑफिसर एम. स्लिमबरसन ने कहा कि मंदिर हुंडी में डाले गए संपत्ति के डॉक्यूमेंट्स पर खुद दावा नहीं ठोक सकता है. यह कागजात फिलहाल भक्त को भी वापस नहीं लौटाए जा सकते हैं. भक्त को इस संपत्ति पर मंदिर का दावा पक्का करने के लिए इसे रजिस्टर कराना होगा. तब तक ये डॉक्यूमेंट मंदिर के पास ही सुरक्षित रहेंगे.
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