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एक भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर ने इंस्टाग्राम पर वायरल हो रहे एक वीडियो में बताया कि किस प्रकार स्वीडिश कार्यस्थल लचीलेपन, समानता और वास्तविक कार्य-जीवन संतुलन को प्राथमिकता देते हैं.
स्वीडन में रहने वाले भारत के एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने यूरोप में वर्क लाइफ के बारे में एक वीडियो के जरिये ये बताया कि यह भारत के कॉर्पोरेट कामों से किस तरह अलग है. अब वायरल हो रहे इंस्टाग्राम वीडियो में आशुतोष सामल ने स्वीडिश और भारतीय वर्कप्लेसेस के बीच के अंतर को बताया. उनके वीडियो को अब तक 8.5 मिलियन से ज़्यादा बार देखा जा चुका है.
उन्होंने कहा कि स्वीडन में कर्मचारी आमतौर पर सुबह 8 बजे काम पर लग जाते हैं, कुछ दफ़्तर दिन की शुरुआत के लिए मुफ़्त नाश्ता भी देते हैं. वर्कप्लेस लचीले होते हैं. कोई निर्धारित डेस्क नहीं है और सीईओ सहित हर कोई अपनी पसंद के हिसाब से बैठता है.
अपने पोस्ट में आशुतोष ने यह भी कहा कि, वहां कोई सख्त पदानुक्रम नहीं है और निश्चित रूप से कोई 'सर कल्चर' नहीं है. 'हर कोई एक ही स्तर पर है. यहां तक कि हमारे सीईओ भी कभी-कभी मेरे बगल में बैठकर काम करते हैं,' उन्होंने इस फ्लैट स्ट्रक्चर को भारत में अक्सर कठोर गतिशीलता की तुलना में ताज़ी हवा की सांस के रूप में वर्णित किया.
लचीलापन सिर्फ़ बैठने तक ही सीमित नहीं है. कर्मचारियों को काम के घंटों के दौरान ब्रेक लेने, गेम खेलने और कॉफ़ी पीने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है. और जब गर्मी आती है, तो कुछ दफ़्तर काम के घंटों को आठ से घटाकर सात घंटे कर देते हैं.
शाम 4 या 4.30 बजे तक, उनके ज़्यादातर सहकर्मी अपना सामान समेटकर निकल जाते हैं, ताकि वे परिवार और दोस्तों के साथ समय बिता सकें. अपने वीडियो के अंत में उन्होंने कहा, 'काम और ज़िंदगी का संतुलन यहां एक सच्चाई है, सिर्फ़ एक चर्चा का विषय नहीं है.'
जैसा कि हम ऊपर ही बता चुके हैं आशुतोष का ये वीडियो वायरल हुआ है इसपर रिएक्शंस की बाढ़ आ गयी है. लोग जमकर रियेक्ट कर ये बता रहे हैं कि भारत में वर्क प्लेसेस में क्या है और क्या नहीं है.
बता दें कि आशुतोष सामल अक्सर इंस्टाग्राम पर स्वीडन में अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी के वीडियो शेयर करते रहते हैं. इससे पहले, सामल स्वीडिश कंपनियों द्वारा अपने कर्मचारियों को दिए जाने वाले कर्मचारी लाभों को सूचीबद्ध करने के लिए सुर्खियों में रहे थे. लाभों का वर्णन करने वाला उनका वीडियो वायरल हो गया था.