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सुमित तिवारी | Jun 16, 2025, 10:55 AM IST
1.क्या है ये प्रथा

इस तरह की अमानवीय प्रथा मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले होती चली आ रही है. यहां के गांवों में ये विचित्र प्रथा कई सालों से लगातार चल रही हैं. इस प्रथा को 'धड़ीचा' के नाम से जाना जाता है. इस प्रथा के तहत साल में एक बार परिवार की युवा महिलाएं और पत्नियां बाजार में किराए पर दी जाती हैं. इस प्रथा में गांव के अमीर लोग जिन्हें शादी के लिए लड़कियां नहीं मिलती वह यहां से पत्नियां खरीदते हैं.
2.किस आधार पर लगती है बोली

यहां पर महिलाओं की कौमर्य, शारीरिक बनावट और उम्र के आधार पर बोली लगाई जाती है. वहीं लीगल सर्विसेज इंडिया की रिपोर्ट बताती है कि इस नीलामी में 8 से 15 साल की कुंवारी लड़कियों को प्राथमिकता दी जाती है.
3.कितना मिलता है पैसा

इसके लिए उन लड़कियों को 15000, से 25000 रुपये तक की राशि प्रदान की जाती है. कभी-कभी ये बोली 2-2 लाख तक जाती है. इस नीलामी में महिला और पुरूष के बीच 10 से 100 रुपये तक के स्टांप पेपर पर अनुबंध किया जाता है.
4.अनुबंध

अगर अनुबंध का समय समाप्त हो गया हो तो महिलाएं इसे रीन्यू भी कर सकती है. लेकिन ये प्रथा कहा तक सही है इसके बारे मे खुद कई लड़कियों ने दुख जताया है.
5.कड़वा सत्य

हालांकि कहा जाता है कि लिंग अनुपात, गरीबी और दहेज प्रथा के कारण ये प्रथा अपनाई जा रही है. लेकिन कहीं न कहीं इस प्रथा के कारण लड़कियों और महिलाएं यौन शोषण का शिकार हो रही है और यह एक कड़वा सत्य हैं.