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इस सरकारी स्कूल ने खास डिजाइन, रिनोवेशन और रिजल्ट की वजह से अपनी खास पहचान बनाई है. स्कूल की बिल्डिंग को ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से स्कूल को यह नया अंदाज दिया.
डीएनए हिंदी: आपने सरकारी स्कूलों की बदहाली की खबरें तो खूब देखी और सुनी होंगी लेकिन झुंझुनूं जिले के पिलानी इलाके के बनगोठड़ी गांव में आजादी से पहले का बना सरकारी स्कूल अपने नए रंग के चलते इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. प्रिंसीपल बलवान सिंह ने स्कूल से बच्चों को जोड़ने के लिए नया आइडिया निकाला और स्कूल को ट्रेन और रेलवे स्टेशन जैसा रूप दे दिया. अब पिलानी के बनगोठड़ी गांव का यह राजकीय सीनियर सैकेंडरी स्कूल ट्रेन वाले स्कूल के नाम से मशहूर हो गया है.
इस सरकारी स्कूल ने खास डिजाइन, रिनोवेशन और रिजल्ट की वजह से अपनी खास पहचान बनाई है. स्कूल की बिल्डिंग को ग्रामीणों के आर्थिक सहयोग से स्कूल को यह नया अंदाज दिया. स्कूल को इस आकर्षक ढंग से रंग रोगन किया गया है कि यह स्कूल कम ट्रेन ज्यादा नजर आता है. यही वजह है कि यह स्कूल लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. छात्र छात्राओं के लिए शैक्षणिक स्तर की व्यवस्थाओं को देखकर हर कोई इस स्कूल की तारीफ कर रहा है.
राजस्थान के झुझुनूं में यह स्कूल, क्रिएटिव लुक जीत रहा है बच्चों का दिल#Rajasthan #ViralVideo pic.twitter.com/lRap1SHapX
— DNA Hindi (@DnaHindi) July 14, 2022
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स्कूल शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ खेलकूद की गतिविधियों में भी अव्वल परिणाम दे रहा है. इस नए अंदाज को रूप देने में ग्रामीणों ने करीब 13 लाख रुपए का आर्थिक सहयोग किया है. ट्रेन जैसी पेंटिंग वाले स्कूल में करीब 300 पढ़ाई करते हैं. स्कूल के बच्चों को भी यह स्कूल का ट्रेन जैसा लुक काफी पसंद आ रहा है. वहीं शिक्षकों का कहना है कि छात्रों के बौद्धिक विकास और बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए इस तरह का विचार मन में आया लेकिन इसका खर्च ज्यादा था. स्कूल के प्रिंसिपल बलवान सिंह ने ग्रामीणों से सहयोग मांगा.
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ग्रामीणों ने गांव के स्कूल की तस्वीर बदलने के लिए विद्यालय विकास समिति को करीब 13 लाख रुपयों का सहयोग किया. स्कूल की दो—दो बिल्डिंगों को रंग रोगन के जरिए ट्रेन जैसा लुक दिया गया है. इन दोनों बिल्डिंगों के कक्षा 1 से 5 के लिए एसआईक्यूई एक्सप्रेस और कक्षा 6 से 12 तक एज्युकेशन एक्सप्रेस नाम रखा गया है. अब स्कूल का बदला लुक बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. इसके बाद से स्कूल में नामांकन शिक्षकों ने भी परिणाम पर फोकस रखा और पिछले 2 वर्षों से स्कूल का परिणाम शत-प्रतिशत रहा है.
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