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राजनाथ सिंह ने पूछा गणित का सिंपल सवाल, 600 IAS ट्रेनी ताकने लगे मुंह, क्या आपको पता है जवाब?

LBSNAA में समापन समारोह के दौरान राजनाथ सिंह ने ट्रेनी IAS अधिकारियों से एक आसान गणित का सवाल पूछा. जिसके बाद कई अधिकारी अटक गए. हालांकि, बाद में उनकी सरल व्याख्या ने माहौल हल्का कर दिया.

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राजनाथ सिंह ने पूछा गणित का सिंपल सवाल, 600 IAS ट्रेनी ताकने लगे मुंह, क्या आपको पता है जवाब?

राजनाथ सिंह

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उत्तराखंड के मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) में 100वें फाउंडेशन कोर्स के समापन समारोह में एक दिलचस्प पल देखने को मिला. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जब ट्रेनी IAS अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे, तभी उन्होंने अचानक सभागार में मौजूद 600 से अधिक अधिकारियों से एक सरल सा गणित का सवाल पूछ लिया. सवाल आसान था, लेकिन पलभर के लिए पूरा हॉल शांत हो गया. उसके बाद जो हुआ, उसने सभी का ध्यान खींच लिया. 

एक सरल गणित का प्रश्न, जिसने सभी को चौंका दिया

दरअसल, मसूरी के LBSNAA में बुधवार को 100वें फाउंडेशन कोर्स का समापन समारोह आयोजित किया गया था. इस कार्यक्रम में देशभर की 19 सेवाओं के करीब 660 ट्रेनी अधिकारी मौजूद थे. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने समारोह में भाग लिया और अधिकारियों को संबोधित किया. भाषण के बीच उन्होंने माहौल को थोड़ा हल्का करते हुए एक सरल गणित का प्रश्न पूछा, जिसने सभी को चौंका दिया. 

ट्रेनी अधिकारी एक-दूसरे की ओर देखने लगे

दरअसल, रक्षा मंत्री ने पूछा, “एक व्यक्ति के पास कुछ पैसे थे. उसने आधे पैसे A को दे दिए, एक-तिहाई B को दे दिए और अंत में जो बचा वह केवल 100 रुपये था, जिसे उसने C को दे दिया. बताइए, उसके पास कुल कितनी राशि थी?” इस सवाल के खत्म होते ही सभागार में सन्नाटा छा गया. ट्रेनी अधिकारी एक-दूसरे की ओर देखने लगे. कई सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया. उसके बाद एक अधिकारी ने उत्तर दिया, 300 रुपये. राजनाथ सिंह मुस्कुराए और बोले, “गलत है, फिर सोचिए. ” इसके बाद एक और अधिकारी ने 600 रुपये बताया, जो बिल्कुल सही निकला. 


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युवा अधिकारियों के लिए यह अनुभव यादगार साबित हुआ

राजनाथ सिंह ने मंच से पूरे सवाल को आसान तरीके से समझाया. उन्होंने इस उदाहरण को आस्था और विश्वास से जोड़ते हुए कहा कि कई समस्याएं तब हल होती हैं, जब हम मानकर चलते हैं कि उनका समाधान जरूर मिलेगा. कार्यक्रम के साथ ही लगभग 14 हफ्तों तक चलने वाला यह फाउंडेशन कोर्स भी समाप्त हुआ, जो 25 अगस्त से शुरू हुआ था. युवा अधिकारियों के लिए यह अनुभव यादगार साबित हुआ, खासकर वह क्षण जब एक सवाल ने पूरा वातावरण बदल दिया. 

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