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भारत सरकार की एयर कंडीशनर (AC) के तापमान 20°C से नीचे और 28°C से ऊपर न रखने के फैसले ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है. बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर की घोषणा के बाद देसी ट्विटर पर मीम्स, चुटकुलों की बाढ़ आ गई है.
भारत सरकार द्वारा एयर कंडीशनर (AC) के तापमान पर सरकार की तरफ से ली गई फैसले ने सोशल मीडिया, विशेष रूप से देसी ट्विटर, पर एक जबरदस्त मीम तूफान खड़ा कर दिया है. बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर की घोषणा के बाद, जहां उन्होंने बताया कि अब AC का तापमान 20°C से नीचे और 28°C से ऊपर नहीं किया जा सकेगा, लोगों ने इस पर अलग-अलग तरह की रिएक्शन दे रहे हैं, जिनमें मीम्स, चुटकुले और बहसें शामिल हैं.
क्या है नया AC तापमान नियम?
बिजली मंत्रालय की प्रस्तावित योजना के अनुसार, देशभर में AC का तापमान एक मानक सीमा के भीतर रखा जाएगा. 20°C से कम ठंडा और 28°C से ज्यादा गर्म नहीं किया जा सकेगा. इस पहल का उद्देश्य ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करना और गर्मी के मौसम में बढ़ती बिजली मांग से निपटना है. मंत्री खट्टर ने कहा, "यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जो तापमान सेटिंग के मानकीकरण की ओर एक बड़ा कदम है."
सोशल मीडिया पर मीमों की बहार
नीति के सार्वजनिक होते ही ट्विटर और इंस्टाग्राम पर मीमों की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने लिखा, "अब तो AC भी सरकारी अफसर बन गया, अपने मन का नहीं कर सकता." वहीं किसी ने मज़ाक में पोस्ट किया, "AC को 19°C पर चलाने के लिए अब वांटेड पोस्टर लगेगा." गर्मी से झुलसते यूजर्स ने व्यंग्य किया कि अब गलती से तापमान 19°C कर दिया तो शायद जुर्माना भी भरना पड़े.
ऊर्जा संकट से जूझता भारत
भारत में गर्मियों के दौरान बिजली की मांग तेज़ी से बढ़ जाती है. पिछले साल यह आंकड़ा 250 गीगावाट के रिकॉर्ड तक पहुंचा था और इस साल 270 गीगावाट तक जाने की उम्मीद है. देश में पहले से करीब 10 करोड़ AC उपयोग में हैं और हर साल 1.5 करोड़ नए AC जोड़े जा रहे हैं. यदि तापमान नियंत्रण जैसे छोटे उपाय अपनाए जाएं, तो ऊर्जा बचत में भारी असर हो सकता है.
क्या होंगे इससे फायदे?
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले के एक अध्ययन के अनुसार, यह नीति 2035 तक देश की अधिकतम बिजली मांग में 60 गीगावाट तक की कमी ला सकती है. इससे सरकार को 7.5 ट्रिलियन रुपये (88 अरब डॉलर) के नए बिजली संयंत्रों और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से राहत मिल सकती है.
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