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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पली नम्रता जैन ने IPS की कुर्सी मिलने के बावजूद IAS बनने का सपना नहीं छोड़ा, तीसरी बार में हुईं सफल.
डीएनए हिंदी: जब आप अपने लिए कोई लक्ष्य तय कर लेते हैं तो उसमें एक पर्सेंट भी ऊपर या नीचे आपको संतुष्ट नहीं कर सकता. कुछ ऐसी ही कहानी है UPSC में 12वीं रैंक हासिल करने वाली नम्रता जैन की. नम्रता ने पहली बार 2015 में UPSCE का पेपर दिया. इस कोशिश में वह सफल नहीं रहीं. उन्होंने साल 2016 में फिर कोशिश की इस बार उन्हें 99 रैंक मिली. इस रैंक के साथ वह आईपीएस अफसर बनीं. उन्हें पद तो मिला लेकिन वह संतुष्ट नहीं थीं. ऐसा इसलिए क्योंकि वह आईएएस बनने का सपना देखती थीं.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पली-बढ़ीं नम्रता जैन ने कुर्सी मिलने के बावजूद आईएएस बनने का अपना जज्बा नहीं खोया. उन्होंने साल 2018 में फिर एग्जाम दिया और इस बार ऑल इंडिया में 12 रैंक लाकर सबको हैरान कर दिया. नम्रता की पढ़ाई को लेकर उनके चाचा सुरेश जैन बताते हैं, 'वह अपनी स्कूली शिक्षा और अपने कॉलेज में भी बहुत पढ़ाकूं लड़की थी. हमें पता था कि वह एक दिन सिविल सेवा परीक्षा पास करेगी.' उन्होंने यह भी बताया कि कैसे उसने पढ़ाई के लिए अपने होमटाउन गीदम से लगभग 350-400 किलोमीटर दूर दुर्ग और भिलाई की यात्रा की थी. उन्होंने कहा, 'उसने अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए बहुत मेहनत की है. उसने कभी पढ़ाई में रुचि नहीं खोई और ध्यान लगाया. यह सब उसकी कड़ी मेहनत का फल है.'
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नम्रता जैन ने बताया सफलता का सीक्रेट
नम्रता का मानना है कि अगर कोई उम्मीदवार आर्थिक रूप से मजबूत है तो उसे नौकरी की जगह सिर्फ तैयारी पर ध्यान देना चाहिए. उनका मानना है कि पूरी तरह समर्पित होकर की इस एग्जाम में सफलता पाई जा सकती है. वह कहती हैं कि जरूरी नहीं कि नौकरी के साथ तैयारी नहीं की जा सकती. यह भी हो सकता है लेकिन आपको फोकस रहने की जरूरत है.
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