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नौकरी के पहले ही दिन जॉइनिंग से किया मना, कंपनी ने लगाया 25 लाख का जुर्माना, शख्स ने पोस्ट कर मांगा सुझाव

एक आईटी प्रोफेशनल ने जॉइनिंग के पहले दिन ही नौकरी न करने का फैसला लिया. लेकिन इस फैसले के लिए उन्हें कंपनी ने 5 लाख का रिकवरी नोटिस थमा दिया.

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नौकरी के पहले ही दिन जॉइनिंग से किया मना, कंपनी ने लगाया 25 लाख का जुर्माना, शख्स ने पोस्ट कर मांगा सुझाव
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अगर आप किसी कंपनी में काम नहीं करना चाहते तो आप वो नौकरी छोड़ सकते हैं. लेकिन नियमों के अनुसार, उसके लिए भी कुछ नियम और प्रावधान बनाए गए हैं. इसी कड़ी में एक बेहद हैरान कर देने वाली खबर सामने आ रही है. यहां एक भारतीय आईटी प्रोफेशनल ने जॉइनिंग के दिन ही नौकरी ना करने का फैसला किया और इसके कुछ ही समय बाद उन्हें कंपनी से 5 लाख रुपये का रिकवरी नोटिस मिल गया. मामला बेहद हैरान करने वाला है. इस घटना को उस शख्स ने रेडिट पर शेयर किया और लोगों से सुझाव मांगे कि इस स्थिति में उसे क्या करना चाहिए. 

शख्स ने किया पोस्ट 

आईटी प्रोफेशनल ने लिखा, "मैंने एक आईटी कंपनी में जॉब के लिए इंटरव्यू और ऑनबोर्डिंग प्रोसेस पूरा कर लिया था. लेकिन व्यक्तिगत और प्रोफेशनल कारणों से मैंने जॉइनिंग के दिन ही कंपनी को ईमेल भेजकर जानकारी दी कि मैं यह नौकरी नहीं ले पा रहा हूं. मुझे लगा कि चूंकि मैंने कंपनी की कोई सैलरी नहीं ली है और कोई संसाधन उपयोग नहीं किया है, इसलिए मामला वहीं खत्म हो गया होगा."

लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें कंपनी की तरफ से एक ईमेल आया जिसमें 5 लाख रुपये की रिकवरी की मांग की गई थी. कंपनी ने कहा कि उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट ब्रेक किया है और बिना नोटिस पीरियड पूरा किए ही नौकरी छोड़ दी है, इसलिए ये जुर्माना राशि टुकानी पड़ेगी. 

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लोगों ने दी प्रतिक्रिया 

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने कई तरह के सजेशन और एक्सपीरियंस शेयर किए. एक यूजर ने लिखा, 'अगर कंपनी ने कोई ट्रेनिंग नहीं दी है तो चिंता की बात नहीं है. वे केवल ट्रेनिंग से जुड़ी हुई वाजिब लागत की ही रिकवरी कर सकते हैं. इसके अलावा ऐसा बॉन्ड लागू नहीं होता.' दूसरे यूजर ने मजाक में कहा, 'उन्हें 10 लाख रुपये का जवाबी नोटिस भेजो, जिसमें लिखा हो कि उन्होंने मानसिक उत्पीड़न किया है.'

वहीं, तीसरे व्यक्ति ने लिखा, 'मुझे भी नोटिस पीरियड के दौरान कंपनी की तरफ से परेशान किया गया था. मैंने भारतीय श्रम कानूनों को पढ़ा और जाना कि ज़्यादातर कंपनियां कर्मचारियों की कानून की जानकारी की कमी का फायदा उठाती हैं. कोई भी बॉन्ड तभी वैध होता है जब वह स्टैम्प पेपर पर हो और नोटरी से साइन किया गया हो. साथ ही अगर ट्रेनिंग पर खर्च नहीं किया गया तो बॉन्ड कानूनी रूप से मान्य नहीं होता. चूंकि ये उसका पहला दिन था तो उसे चिंता नहीं करनी चाहिए.'

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