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लंदन में काम करने वाली एक भारतीय महिला ने हफ्ते में पांच दिन ऑफिस में काम करने से इनकार किया है. इसी के साथ महिला ने पारंपरिक काम के तरीकों को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है.
Indian employee London: लंदन में काम करने वाली एक भारतीय महिला ने हफ्ते में पांच दिन ऑफिस में काम करने से इनकार किया है. इसी के साथ महिला ने पारंपरिक काम के तरीकों को लेकर एक नई चर्चा शुरू कर दी है. एक ऐसा वक्त जब कोविड के बाद कर्मचारियों को दोबारा दफ्तर बुलाया जा रहा है. वहीं वर्क फ्रॉम होम में रच-बसे कर्मचारी दफ्तार जाने से कतरा रहे हैं. ऐसे वक्त में 25 साल की तरुणा विनायकिया ने हफ्ते में पांच दिन दफ्तर जाने से इनकार किया है. तरुणा ने कहा है कि वह अपनी पसीने की कमाई लंदन के महंगे यातायात वाहनों में दफ्तर आने-जाने में खर्च नहीं करेगी.
विनायकिया ने तीन दिन पहले लिंक्डिन पर एक पोस्ट लिखा और अपनी परेशानी बताई. विनाकिया के मुताबिक, दफ्तरों में वापसी खर्चों में बढ़ोतरी और जनरेशन जेड प्रोफेशनल्स की कमाई को प्रभावित कर रहा है.
विनायकिया ने लिंक्डिन पर लिखा, 'मैं 25 साल की हूं. एक अच्छी-खासी जगह नौकरी करती हूं. लंदन में रहती हूं. और फिर भी हर महीने अपने खर्चे पूरे करने में जद्दोजहद महसूस करती हूं. एक घर लेना? शायद कभी पूरा नहीं होगा. '
वहीं उन्होंने आगे करियर ग्रोथ पर भी सवाल उठाए. महिला ने लिखा, 'कॉरपोरेट में रैंक में ऊपर चढ़ना मुश्किल है. उच्च पदों पर पहले ही वे लोग हैं जो शायद कभी उस नौकरी को छोड़ने वाले नहीं हैं. जब तक वे रिटायर नहीं होंगे तब तक वे नौकरी नहीं छोड़ेंगे. और किस लिए? ऐसे में नाममात्र के सैलरी इंक्रीमेंट के लिए कड़ी मेहनत करना, जो शायद महंगाई के साथ भी तालमेल न उठा पाए, कितना सही है?'
विनायकिया ने दफ्तरों में रोजाना जाने की नीति का विरोध किया. उन्होंने सैलरी न बढ़ने पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि जनरेशन जेड के कर्मचारियों के साथ उनकी मेहनत के हिसाब से सही भुगतान और मुनाफे नहीं दिए जा रहे हैं. हमसे उम्मीद की जाती है कि हम पिछले चार या पांच सालों में एक ही सैलरी पर काम करते रहें, जबकि महंगाई आसमान छू रही होती है. इसी बीच पहले की पीढ़ियों ने घर खरीद लिये हैं, बचत की है और छुट्टियां मनाने जाते हैं और हमसे उम्मीद की जाती है कि हम अभी और मेहनत करें.'
उन्होंने ऑफिस आने-जाने में टैक्स्ड सैलरी को खर्च करने पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि सिर्फ ऑफिस में सीट पर बैठने के लिए जाने का क्या मतलब है. डेस्क पर बैठकर वर्चुअल मीटिंग अटेंड करने का काम घर से भी हो सकता है. विनायकिया ने आगे लिखा, 'हमसे पहले की पीढ़ियों ने अपने करियर में फ्री लंच, प्रतिभूति ट्रैवल, काम से जुड़ी ट्रिप, बोनस, स्टॉक ऑप्शन्स और मीटिंग के लिए सामने व्यक्ति के साथ बैठकर कॉफी पी है. अब? हम सौभाग्यशाली हैं, अगर गुनगुना पिज्जा और बीयर पी ले रहे हैं तो.'

अपनी बात को खत्म करते हुए दुरहम यूनिवर्सिटी एलुमना ने कहा कि जनरेशन जेड लचीलापन और कल्याण की बात कर रही है. और दफ्तरों में डेस्क पर बैठकर काम करके अपनी गाढ़ी कमाई खर्च न करने को कह रही है.
विनायकिया का पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और यूजर्स तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं. एक लिंक्डिन यूजर ने महिला को सलाह दी कि वे फ्रीलांसिग करें. वहीं, एक अन्य ने लिखा, '50 साल का होने के नाते मैं आपकी सभी बातों से सहमत नहीं हूं. हम जिस भी उम्र में हों, हर दिन ठगे जाते हैं.'
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तरुणा विनायकिया वर्तमान में Lego Group में स्ट्रैटजी मैनेजर के तौर पर काम करती हैं. उन्होंने दुरहम युनिवर्सिटी से मार्केटिंग में एमए किया है और स्टेला मैरिस कॉलेज से बीबीए किया है.
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