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परिवार के मुताबिक देबेन हाजरा साल के थे उनका जन्म 1903 में हुआ था. देबेन हाजरा के दो बेटे और तीन बेटियां है और अब देबेन हाजरा के लगभग 150 पोते-पोतियां हैं.
डीएनए हिंदी: मृत्यु के नाम से ही डर लगता है. कहीं से भी ऐसी खबर आए तो दिमाग में अजीब-अजीब खयाल आने लगते हैं. दुख का यह माहौल किसी को भी अंदर तक तोड़ देता है लेकिन कभी-कभी ऐसे मौकों पर लोग खुशियां भी मनाते हैं और ढोल-बाजे के साथ अंतिम विदाई देते हैं. ऐसा तब किया जाता है जब घर का कोई बूढ़ा-बुजुर्ग अच्छी उम्र के बाद परलोक सिधारता है. कुछ ऐसी ही खुशी पश्चिम बंगालके हावड़ा में एक परिवार को मिली जहां 119 साल के देबेन हाजरा की मृत्यु के बाद उनते पोते-पोतियों ने धूमधाम से शवयात्रा निकाली.
देबेन हाजरा को गाना बजाना बहुत पसंद था और वह आस पास के सभी गांवों में जाकर नाटक देखा करते थे. शनिवार (20 अगस्त) को देबेन हाजरा की मृत्यु के बाद उनकी अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए इनके पोते ने अंतिम यात्रा में डीजे लगाया. इस अंतिम यात्रा में उनके परिवार वाले और पड़ोसी सभी बिना आंसू बहाए खुशी से नाचते हुए दिखे. सभी लोग डीजे की धुन पर थिरकते दिखे.
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परिवार के मुताबिक देबेन हाजरा साल के थे उनका जन्म 1903 में हुआ था. देबेन हाजरा के दो बेटे और तीन बेटियां है और अब देबेन हाजरा के लगभग 150 पोते-पोतियां हैं. वह अपना ज्यादातर समय इन बच्चों के साथ ही हसंते-खेलते बिताते थे. उनकी मृत्यु बढ़ती उम्र की बीमारियों के कारण हुई है.
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