ट्रेंडिंग
भारत के युवाओं, खासकर जेनरेशन Z के बीच "नकली शादियों" का ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में लोग बिना असली दूल्हा-दुल्हन के शादी जैसी पार्टियां कर रहे हैं, जिसमें ढोल, वरमाला, पारंपरिक कपड़े और नकली पंडित तक शामिल होते हैं.
भारत के महानगरों में एक नया और दिलचस्प ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, नकली शादियां. ये वो शादियां हैं जिनमें न कोई असली जोड़ा होता है, न कोई कानूनी या सामाजिक बंधन. लेकिन इसके बावजूद, इनमें असली भारतीय शादी का हर तामझाम मौजूद होता है. ढोल. नगाड़े, पारंपरिक परिधान, वरमाला, हल्दी, मेहंदी, और यहां तक कि नकली पंडित भी. बस फर्क इतना है कि ये सब केवल मस्ती और पार्टी के लिए होता है.
शादी का पारंपरिक बोझ, सामाजिक जिम्मेदारियाँ, रिश्तेदारों का दखल और रीति.रिवाज़ों की लंबी लिस्ट.इन सबसे अलग, ये नकली शादियाँ मौज.मस्ती, स्वतंत्रता और कंटेंट क्रिएशन पर फोकस करती हैं. जेनरेशन Z के लिए यह सिर्फ़ एक थीम पार्टी नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक बयान है. दिल्ली, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में ये फेस्टिवल जैसा माहौल तेजी से युवाओं को आकर्षित कर रहा है.
जैसे कि इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर मुकुल खुराना ने बताया, दिल्ली की "जुम्मा की रात" जैसी थीम पार्टियाँ 500 रुपये से लेकर 3000 रुपये तक की एंट्री फीस वसूलती हैं. इनमें प्रोफेशनल टिकटिंग से लेकर अनौपचारिक रूफटॉप या कॉलेज इवेंट्स तक सब कुछ शामिल है. यह ट्रेंड अब सिर्फ़ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के कॉर्नेल यूनिवर्सिटी जैसे विदेशी कैंपसों में भी पहुँच चुका है.
सोशल मीडिया पर इस ट्रेंड को लेकर लोगों की राय मिश्रित है. कुछ इसे सिर्फ एक फैड मानते हैं जो जल्द ही गायब हो जाएगा. वहीं कुछ इसे आज़ादी और रचनात्मकता की मिसाल मानते हैं. एक यूज़र ने कहा, "मुझे AIB का फेवेंट याद आ गया, वो वाकई इस ट्रेंड से आगे थे." दूसरी ओर कुछ लोगों ने इसे संस्कृति और मूल्यों का पतन कहा.
यह सवाल अब उठने लगा है कि क्या शादी का असली मतलब खो रहा है या फिर यह एक नए ज़माने का सेलिब्रेशन मॉडल है? चाहे राय कुछ भी हो, एक बात तो साफ है. नकली शादियां असली बातचीत का मुद्दा बन चुकी हैं, और जेनरेशन Z इसे पूरे जोश के साथ अपना रही है.
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