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Gay कपल ने जॉइन की आर्मी, सोशल मीडिया यूजर्स ने किए ऐसे कमेंट

जुहान और रोमानोवा 2014 में क्रीमिया से कीव चले आए थे. यह तब की बात है जब पुतिन ने पूर्वी प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया.

Gay कपल ने जॉइन की आर्मी, सोशल मीडिया यूजर्स ने किए ऐसे कमेंट
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डीएनए हिंदी: यूक्रेन और रूस युद्ध को तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है अभी भी वहां हालात सामान्य नहीं हैं. वहां से कभी दिल दहला देने वाली तो कभी प्रेरणा देने वाली कहानियां सामने आ रही हैं. फिलहाल एक गे कपल चर्चा में छाया हुआ है. यूक्रेनी सेना और आम जनता बहादुरी से रूस का मुकाबला कर रही है. युद्ध के पहले दिन से ही उनके विरोध के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं. मार्च में, एक 80 वर्षीय यूक्रेनी शख्स ने अपने पोते के लिए लड़ने के लिए सेना में भर्ती होने की कोशिश की थी. इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध में भाग ले चुके दिग्गज ओल्हा तेवरडोखलिबोवा नाम की एक 98 वर्षीय महिला ने यूक्रेनी सेना में शामिल होने की पेशकश की थी.

इन उदाहरणों ने दुनिया को इस बात का साफ अंदाजा दिया है कि देश के लोग इस समय कितना कड़ा विरोध कर रहे हैं. अब सेना में भर्ती की एक और कहानी सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. इस कहानी को नेटिजन्स की खूब तारीफें मिल रही हैं. यूक्रेन का एक LGBTQ+ कपल देश की आर्म्ड फोर्स में शामिल हुआ और दोनों ही मिलकर युद्ध के लिए फ्रंटलाइन में खड़े हैं. वह न सिर्फ यूक्रेन बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. अलेक्जेंडर जुहान और एंटोनिना रोमानोवा दोनों की उम्र 37 साल है. युद्ध शुरू होने से पहले वह दोनों थिएटर में काम करते थे दोनों मूल रूप से क्रीमिया के रहने वाले हैं.

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जुहान और रोमानोवा 2014 में क्रीमिया से कीव चले आए थे. यह तब की बात है जब पुतिन ने पूर्वी प्रायद्वीप पर कब्जा कर लिया. 24 फरवरी के हमले के बाद दोनों दो दिन तक अपने बाथरूम में छिपे रहे. इस कपल ने पहले कभी किसी हथियार का इस्तेमाल नहीं किया था. इसके बावजूद सेना में भर्ती होने का फैसला किया. रोमानोवा ने कहा, 'मुझे बस यह याद है कि हमारे पास केवल तीन विकल्प थे: या तो एक बम शेल्टर में छिपो, भागकर जान बचा लो, या फिर वॉलिंटियर्स में शामिल हो जाओ. हमने तीसरा विकल्प चुना.' वहीं जुहान ने कहा कि रूसी सेना न केवल यूक्रेनियन को मार रही है बल्कि उनकी संस्कृति को नष्ट करने की भी कोशिश कर रही है.

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इस कपल का सेना में जोरशोर से स्वागत किया गया है और दुनिया भर में नेटिजन्स ने इसकी तारीफ की. वे परेशान थे कि सेना में भेदभाव और समलैंगिकता का अनुभव हो सकता है लेकिन उन्हें अभी तक ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा. उन्होंने मई के महीने में एक ब्रेक लिया लेकिन 25 मई को फिर से फ्रंटलाइन पर वापस चले गए.

 

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