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लखनऊ में दर्दनाक हादसा.... घोड़े से टकराई डॉक्टर की बाइक, पिता की मौत, बेटा गंभीर

लखनऊ में एक दर्दनाक सड़क हादसे में बाइक सवार डॉक्टर की सड़क पर अचानक आए घोड़े से टक्कर हो गई. इस टक्कर में डॉक्टर और घोड़े दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठा उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है.

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लखनऊ में दर्दनाक हादसा.... घोड़े से टकराई डॉक्टर की बाइक, पिता की मौत, बेटा गंभीर

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लखनऊ में सोमवार देर रात एक बेहद दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसमें डॉ. नवल किशोर, जो रहीमाबाद के तेरवा गांव के निवासी थे, की घोड़े से टकराकर मौके पर ही मौत हो गई. हादसे में उनका बेटा करण गंभीर रूप से घायल हो गया और उसे ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया है. 

घोड़े से उनकी बाइक टकरा गई

डॉ. नवल किशोर लोधई इलाके में वर्षों से अपना क्लीनिक चला रहे थे. हादसे की रात वे अपने बेटे करण के साथ गढ़ी जिन्दौर के एक ढाबे से खाना खाकर लौट रहे थे, तभी हरदोई रोड पर सड़क पर अचानक आए एक घोड़े से उनकी बाइक टकरा गई. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर उछलकर गिर पड़े. 

हेलमेट न पहनने की भारी चूक 

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय डॉ. नवल किशोर ने हेलमेट नहीं पहना था, जिससे सिर में गंभीर चोट लगने की वजह से उनकी मौत हो गई. करण को भी काफी चोटें आई हैं, लेकिन इलाज जारी है और डॉक्टरों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है. 

ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया

सूचना मिलते ही इंस्पेक्टर रहीमाबाद आनंद कुमार द्विवेदी मौके पर पहुंचे और घायलों को सीएचसी मलिहाबाद भेजा गया. डॉक्टरों ने डॉ. नवल को मृत घोषित कर दिया और करण को ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया. 

परिवार में छाया मातम, दो शादियों से थे बच्चे 

डॉ. नवल किशोर का पारिवारिक जीवन भी थोड़ा जटिल था. उनकी दो शादियाँ हुई थीं. पहली पत्नी नंदनी गौतम से उन्हें चार बेटियाँ और एक बेटा है, जबकि दूसरी पत्नी ममता से उनका बेटा करण है, जो इस हादसे में घायल हुआ. 

हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. 

आवारा जानवर बने जानलेवा खतरा 

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हरदोई रोड पर आवारा जानवरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है, जिससे इस तरह के हादसे आए दिन होते हैं. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इन जानवरों पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि ऐसी दुखद घटनाएं दोहराई न जाएं. 

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