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अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की मौत के बाद एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट्स को लेकर सवाल उठने लगे हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, वे ग्लूटाथियोन इंजेक्शन और सप्लीमेंट्स ले रही थीं, जो बिना चिकित्सकीय निगरानी के खतरनाक हो सकते हैं.
हाल ही में अभिनेत्री शेफाली जरीवाला की मौत की खबर ने सभी को चौंका दिया. रिपोर्ट्स के अनुसार, वे एंटी-एजिंग दवाओं और ग्लूटाथियोन इंजेक्शन का इस्तेमाल कर रही थीं. उपवास के दौरान ऐसी दवाएं लेना उनके शरीर के लिए भारी पड़ सकता है. उनकी मौत की वजह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे एंटी-एजिंग ट्रीटमेंट की सुरक्षा पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं.
एंटी-एजिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य उम्र बढ़ने के शारीरिक, मानसिक और त्वचा संबंधी प्रभावों को धीमा करना है. यह बायोटेक्नोलॉजी, जेनेटिक इंजीनियरिंग और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट का मिश्रण है. कंपनियां ग्लूटाथियोन इंजेक्शन, कोलेजन सप्लीमेंट और स्किन ट्रीटमेंट्स के जरिए लोगों को जवान दिखाने के दावे कर रही हैं.
गूगल की सब्सिडरी कैलिको लैब्स उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने और उसे रोकने के उपाय खोजने में जुटी है. इस प्रोजेक्ट में अब तक 3.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया जा चुका है. यहां स्टेम सेल रिसर्च, CRISPR तकनीक, जेनेटिक बदलाव और माइटोकॉन्ड्रियल सुधार जैसे प्रयोग किए जा रहे हैं ताकि जीवनकाल को बढ़ाया जा सके.
अकेला गूगल ही नहीं, अमेज़न के जेफ बेजोस भी Altos Labs नामक कंपनी में निवेश कर चुके हैं जो सेलुलर रीजुवनेशन पर काम कर रही है. Juvenescence, Unity Biotechnology और Insilico Medicine जैसी कंपनियां भी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को चुनौती देने में लगी हैं.
‘सैपियंस’ के लेखक युवाल नोआ हरारी के अनुसार, 21वीं सदी में उम्र बढ़ना अब जैविक नहीं बल्कि तकनीकी समस्या माना जा रहा है. विज्ञान इसे हल करने में सक्षम हो सकता है, लेकिन इसका नैतिक पक्ष भी है क्या ये तकनीक सिर्फ अमीरों तक सीमित रहेगी?