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तेल और घी को लेकर लिवर की सेहत पर चल रहे भ्रम को डॉक्टरों ने दूर किया है. आइए चलिए जानते हैं कि हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए अपने खाने में हमें तेल या घी किसी चीज का इस्तमाल करना चाहिए.
क्या आप भी अकसर सोचते हैं कि लिवर की सेहत के लिए तेल बेहतर है या घी? या इस उलझन में हैं कि कहीं इन्हें डाइट में शामिल करने से फैटी लिवर जैसी समस्या न हो जाए? अगर हां, तो यह लेख आपके लिए ही है. इस लेख में डॉक्टर आशीष कुमार की सलाह के आधार पर जानेंगे कि तेल और घी से जुड़ी कौन-सी बातें सच हैं और कौन-सी भ्रम.
अक्सर लोग घी और तेल को दोषी ठहराते हैं, जबकि डॉक्टरों का मानना है कि ये जहर नहीं, बल्कि ज़रूरत के अनुसार सेहतमंद फैट्स हो सकते हैं. असली समस्या तब होती है जब इनका सेवन सीमा से ज्यादा हो जाता है. दोनों में कैलोरी की मात्रा अधिक होती है, और ज्यादा सेवन से शरीर में फालतू कैलोरी जमा हो जाती है, जिससे वजन बढ़ता है और आगे चलकर फैटी लिवर जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.
अगर आप घी पसंद करते हैं तो दिन में 1-2 चम्मच घी लेना उचित है. तेल और घी मिलाकर भी अधिकतम 3-4 चम्मच प्रतिदिन ही इस्तेमाल करना चाहिए. याद रखें कि "जितना जरूरी, उतना ही सही". यही लिवर हेल्थ का सबसे महत्वपूर्ण मंत्र है.
एक ही तेल बार-बार गर्म न करें, खासतौर पर रिफाइंड ऑयल. इससे हानिकारक कंपाउंड्स बनने लगते हैं जो लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं. तेल बदल-बदल कर इस्तेमाल करें – जैसे कुछ दिन सरसों का तेल, फिर मूंगफली, सूरजमुखी या ऑलिव ऑयल. इससे शरीर को अलग-अलग पोषक तत्व मिलते हैं. डीप फ्राई या तला-भुना खाना कम करें, क्योंकि इसमें ट्रांस फैट्स बनते हैं जो लिवर के लिए हानिकारक होते हैं.
डॉक्टर का जवाब है हां, यदि आप सामान्य रूप से स्वस्थ हैं या फैटी लिवर की शुरुआती अवस्था में हैं, तो सीमित मात्रा में तेल और घी का सेवन सुरक्षित है. लेकिन अगर लिवर की कोई गंभीर बीमारी है, तो आपको अपने डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए.
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