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Fact Check: लोको पायलट ने समोसे खाने के लिए रोकी ट्रेन? Viral Video पर रेलवे ने किया दूध का दूध-पानी का पानी

इंदौर-महू रेलखंड पर समोसे के लिए ट्रेन रोकने का वायरल वीडियो निकला भ्रामक. रेलवे ने स्पष्ट किया कि मालगाड़ी इंजीनियरिंग कार्य के लिए रुकी थी, न कि नाश्ता खरीदने के लिए. सच्चाई जानें.

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Fact Check: लोको पायलट ने समोसे खाने के लिए रोकी ट्रेन? Viral Video पर रेलवे ने किया दूध का दूध-पानी का पानी

Image Credit: Viral Video

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हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि इंदौर-महू रेलखंड पर एक लोको पायलट ने महज समोसे खरीदने के लिए बीच रास्ते में ट्रेन रोक दी. वीडियो में एक सहायक लोको पायलट (ALP) को रेलवे ट्रैक के पास स्थित एक दुकान से समोसे की थैली लेते हुए और वापस इंजन में चढ़ते हुए देखा जा सकता है. इस वीडियो ने इंटरनेट पर तूल पकड़ लिया और लोग रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगे. हालांकि, पश्चिम रेलवे ने इस पूरे मामले की वास्तविकता सामने लाकर इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है.

क्या है सच्चाई?

पश्चिम रेलवे के आधिकारिक बयान के अनुसार, वायरल हो रहे दावे पूरी तरह से असत्य और दिग्भ्रमित करने वाले हैं. रेलवे ने स्पष्ट किया है कि वीडियो में दिख रही ट्रेन कोई यात्री ट्रेन (DEMU) नहीं, बल्कि एक मालगाड़ी थी. यह मालगाड़ी राऊ (RAU) यार्ड में चल रहे इंजीनियरिंग कार्य के कारण पहले से ही 'RAU होम सिग्नल' पर अधिकृत रूप से रुकी हुई थी.

क्या सच में लोको पायलेट ने समोसे के लिए रोकी ट्रेन?

चूंकि ट्रेन पहले से ही किसी कार्य के चलते खड़ी थी, इसी दौरान सहायक लोको पायलट अपनी व्यक्तिगत आवश्यकता के लिए भोजन (समोसे) लेने गया था. ट्रेन को समोसे खरीदने के लिए बिल्कुल नहीं रोका गया था.

गलत सूचना का प्रसार

रेलवे प्रशासन ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि कैसे एक सामान्य घटना को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया. वीडियो को जानबूझकर यात्री ट्रेन से जोड़कर प्रचारित किया गया, ताकि लोगों के मन में रेलवे के प्रति भ्रम पैदा हो सके. रेलवे ने इसे जनता को गुमराह करने का एक प्रयास बताया है.

रेलवे की नागरिकों से अपील

पश्चिम रेलवे ने आम जनता से आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे असत्यापित वीडियो और दावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. रेलवे ने स्पष्ट कहा कि भ्रामक जानकारी साझा करने से न केवल विभाग की छवि धूमिल होती है, बल्कि समाज में अनावश्यक डर और भ्रम भी फैलता है. किसी भी सूचना को साझा करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच करना अत्यंत आवश्यक है.

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