UPI New Rules In Hindi: सुरक्षा को मजबूत करने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए एनपीसीआई ने कलेक्ट रिक्वेस्ट की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है. इसके अलावा, अब पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूजर्स को QR कोड, मोबाइल नंबर या यूपीआई आईडी का इस्तेमाल करना होगा. आइए इस नए फीचर के बारे में जानते हैं.
UPI New Rules In Hindi: आज के डिजिटल युग में UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस से भुगतान करना सबसे सरल और तेज माध्यम बन चुका है. करोड़ों छोटे-बड़े पेमेंट रोजाना यूपीआई के जरिए किए जा रहे हैं. इस डिजिटल क्रांति को और अधिक सुरक्षित और कुशल बनाने के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने हाल ही में यूपीआई से जुड़े कई बड़े और अहम बदलावों की घोषणा की है. इन नियमों का सीधा असर करोड़ों यूजर्स की लेन-देन की आदतों और सुरक्षा पर पड़ेगा. तो आइए हम आपको यहां बताते हैं कि यूपीआई के इस नए फीचर के आने से यूजर्स को कितना फायदा होगा?
UPI का नया नियम क्या है?
अब से केवल "पुश-बेस्ड पेमेंट" ही मान्य होंगे. यानी पैसे ट्रांसफर करने के लिए यूजर्स को QR कोड, मोबाइल नंबर या यूपीआई आईडी का इस्तेमाल करना होगा. यह नियम 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो गया है.
सुरक्षा को मजबूत करने और धोखाधड़ी को रोकने के लिए एनपीसीआई ने कलेक्ट रिक्वेस्ट की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है. कई मामलों में इस सुविधा का दुरुपयोग किया जा रहा था.
ट्रांजैक्शन लिमिट में भी किए गए बदलाव
- उच्च मूल्य के ट्रांजैक्शन को आसान बनाने के लिए कई विशिष्ट सेक्टर्स में प्रति-ट्रांजैक्शन और दैनिक सीमा को बढ़ा दिया गया है.
- कैपिटल मार्केट और इंश्योरेंस सेक्टर में पहले ट्रांजैक्शन की लिमिट ₹2 लाख थी, जो अब ₹5 लाख कर दिया गया है. साथ ही, ये लोग 24 घंटे के भितर 10 लाख रुपये तक का भुगतान कर सकते हैं.
- सरकारी ई-मार्केटप्लेस और टैक्स पेमेंट्स वालों की लिमिट पहले सिर्फ ₹1 लाख थी, पर अब इसे बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है.
- ट्रैवल के लिए टिकट बुकिंग्स से जुड़े खर्च को लेकर भी ट्रांजैक्शन की लिमिट 5 लाख रूपये तय की गई है और रोजाना सीमा 10 लाख रूपये तय है.
- क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट में भी अब 5 लाख तक का भुगतान किया जा सकेगा. रोजाना सीमा की बात करें तो 6 लाख रूपये तय की गई है.
UPI यूजर्स के लिए क्यों लाए गए ये बदलाव?
- ऑटोपे भुगतान (जैसे सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) अब से केवल नॉन-पीक ऑवर्स में ही एक्सिक्यूट किए जाएंगे, ताकि ट्रांजैक्शन सुचारू रूप से प्रोसेस हो सके और सर्वर पर लोड कम हो.
- बदलावों का उद्देश्य सिस्टम पर बैलेंस और स्टेटस चेक की लिमिट लगाने से अनावश्यक दबाव कम होगा और यूपीआई प्लेटफॉर्म की समग्र दक्षता और गति में सुधार होगा. साथ ही, धोखाधड़ी पर लगाम लगेगा.
- ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़ने से यूजर्स को बड़ी राशि के भुगतान के लिए यूपीआई का उपयोग करने में आसानी होगी.
- सिस्टम पर अनावश्यक दबाव कम करने और सर्वर लोड को संतुलित करने के लिए कुछ ऑपरेशनल कार्यों पर भी सीमाएं लगाई गई हैं.
- अब एक यूजर किसी भी यूपीआई ऐप पर दिन में केवल 50 बार तक ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेगा.
- पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस देखने की अनुमति केवल 3 बार होगी. हर बार चेक करने के बीच कम से कम 90 सेकंड का अंतराल रखना अनिवार्य होगा.
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